कौन हैं समिक भट्टाचार्य? जिन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बनाया गया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष
Who is Samik Bhattacharya: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में भाजपा राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बनाने में जुटी हुई हैं। राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य को 3 जुलाई 2025 को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त दिया है। समिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय मंत्री और वर्तमान अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का स्थान लिया है।
यह नियुक्ति ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।आइए जानते हैं कौन हैं समिक भट्टाचार्य? आखिर इन्हें ही क्यों सौंपी गई यै अहम जिम्मेदारी और इनके सामने क्या चुनौतियां होंगी?

कौन हैं सामिक भट्टाचार्य?
- 61 वर्षीय समिक भट्टाचार्य के पास चार दशकों से अधिक का राजनीतिक अनुभव है।
- 1971 में हावड़ा से आरएसएस के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।
- 1990 के दशक में अपने प्रभावशाली भाषण कौशल के कारण वे पार्टी के लोकप्रिय चेहरों में गिने जाने लगे और संगठन में लगातार आगे बढ़ते गए।
- भारतीय जनता युवा मोर्चा के दक्षिण हावड़ा मंडल के महासचिव और हावड़ा जिले के महासचिव जैसे कई पदों पर कार्य किया।
- भाजपा की युवा शाखा का राज्य महासचिव नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 11 वर्षों तक बने रहे। भट्टाचार्य ने तीन कार्यकालों तक पश्चिम बंगाल भाजपा के महासचिव के रूप में भी योगदान दिया।
- वर्ष 2014 में, उन्होंने बशीरहाट दक्षिण विधानसभा उपचुनाव जीता और एक वर्ष से अधिक समय तक विधायक रहे।
- पिछले वर्ष उन्हें राज्यसभा में भेजा गया। एक वरिष्ठ माकपा नेता ने कहा, "वे इतने प्रभावशाली वक्ता हैं कि विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्रा (सीपीआई-एम) ने उन्हें विधानसभा में अपने कोटे से बोलने का समय दिया, क्योंकि 2014 से 2016 तक वे अकेले भाजपा विधायक थे और उन्हें पांच मिनट से अधिक का समय नहीं दिया जा रहा था।"
- भट्टाचार्य कविताओं के शौकीन हैं और अक्सर शंख घोष और शक्ति चट्टोपाध्याय जैसे अपने पसंदीदा कवियों को उद्धृत करते हैं। वर्ष 2017 में, राज्य सीआईडी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन में कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में उन्हें तलब किया था।
समिक भट्टाचार्य को ही क्यों सौंपी भाजपा ने सौंपी अहम जिम्मेदारी?
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी हमेशा जमीनी स्तर के नेताओं को पसंद करती है। सामिक भट्टाचार्य खास तौर पर विधानसभा चुनावों से पहले एकदम सही विकल्प हैं। सभी जिला स्तर के नेता उन्हें वर्षों से जानते हैं और उनसे आसानी से बात कर सकते हैं। राजनीति के जानकारों के अनुसार सामिक भट्टाचार्य की छवि साफ-सुथरी रही है। राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ कभी विद्रोह न करना, पार्टी के सभी गुटों के साथ अच्छे संबंध और आरएसएस से नजदीकी के कारण उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई। सामिक की एक खासियत है कि वह कभी भी नेताओं पर व्यक्तिगत हमले नहीं करते हैं। बीजेपी उनके नेतृत्व में 2026 का चुनाव एकजुट होकर लड़ेगी।
समिक भट्टाचार्य के सामने चुनौतियां
बंगाल में अध्यक्ष बनाए जाने के बाद समिक भट्टाचार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा की राज्य इकाई में मौजूदा गुटबाजी को समाप्त करना है। सुकांता मजूमदार, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और पूर्व सांसद दिलीप घोष के नेतृत्व वाले गुटों के बीच खींचतान चलती रही है। केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि भट्टाचार्य राज्य इकाई के विभिन्न गुटों के लिए स्वीकार्य साबित होंगे। 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी कैसा प्रदर्शन करती है। यह उनके नेतृत्व की असली परीक्षा होगी। केंद्रीय नेतृत्व को विश्वास है कि वे पार्टी के विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाने में सक्षम होंगे।
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