पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में फिर से दोहराया गया हिंसा का इतिहास, कई लोगों की गई जान
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से पंचायत चुनाव के दौरान जमकर हिंसा देखने को मिली। इस बार भी पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा में 12 लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
पंचायत चुनाव के दौरान गांव में बम फेके गए, बैलेट बॉक्स को लूटा गया। लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान ये घटनाएं आम है, इस तरह की घटनाएं हर बार चुनाव के दौरान देखने को मिलती हैं।

बंगाल में 2003 से लगातार हर बार पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा देखने को मिली है। अभी तक पंचायत चुनाव में बंगाल में 2003 के बाद 76 लोगों की जान जा चुकी है। मतदान के दिन ही 40 लोगों की जान चली गई थी।
पिछले महीने प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया था, उसके बाद से लगातार हिंसा देखने को मिली। 2018 की ही तर्ज पर इस बार के पंचायत चुनाव में भी काफी हिंसा देखने को मिली।
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान 12 लोगों की मौत हुई, जिसमे से 8 लोग टीएमसी के हैं, जबकि एक व्यक्ति सीपीआईएम, भाजपा और कांग्रेस के हैं। इन सभी लोगों की मौत की जानकारी पंचायत चुनाव की रात को सामने आई है।
विश्लेषकों का कहना है कि पंचायत चुनाव में हिंसा अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले का ट्रेलर हैं। बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। टीएमसी नेता शशि पांजा ने दावा किया है कि बीती रात चौंकने वाली घटना हुई है। भाजपा, सीपीआईएम और कांग्रेस सब मिले हैं।
टीएमसी कार्यकर्ता सतशुद्दीन शेख की मुर्शीदाबाद जिले हत्या कर दी गई। भाजपा के पोलिंग एजेंट पर भी कुछ लोगों ने हमला करके मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा माया बर्मन नाम की उम्मीदवार को भी चोट आई है।
भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह चुनाव नहीं है, पूरे प्रदेश में हिंसा फैली है। केंद्रीय बलों को तैनात नहीं किया गया, सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, यह वोटिंग नहीं लूट है। टीएमसी और प्रदेश की पुलिस एक साथ हिंसा में शामिल हैं।












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