पश्चिम बंगाल में ट्रांसजेंडर को रक्तदान से रोका, जानिए क्या है नियम

पश्चिम बंगाल से निराश करने वाली खबर सामने आई है। यहां एक ट्रांसजेंडर को रक्तदान करने से रोक दिया गया है। पश्चिम बंगाल के बांघुली में आयोजित रक्तदान शिविर में ट्रांसजेंडर को इसलिए रक्तदान करने से रोक दिया गया क्योंकि कि उससे एचआईवी का जोखिम बढ़ सकता था।

हालांकि कुछ देर तक बहस के बाद स्वास्थ्यकर्मी ने उसे रक्तदान करने की अनुमति दे दी। लेकिन इस घटना के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर क्यों ट्रांसजेंडर को रक्तदान करने से रोका गया।

blood donation

असोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स के जनरल सेक्रेटरी रंजीत सुर ने बताया कि मैं इस तरह की घटनाओं का समर्थ नहीं करता हूं। मेरे हिसाब से यह मानवाधिकार का हनन है।

इस घटना के बाद जब मैंने देखा तो नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन के अनुसार ट्रांसजेंडर, गे, लेस्बियन और होमोसेक्सुअल के लिए गाइडलाइन है कि वह रक्तदान नहीं कर सकते हैं। लेकिन ऐसा क्यों हैं इसकी वजह नहीं बताई गई है, यह पूरी तरह से अवैज्ञानिक है।

उन्होंने कहा कि कई लोगों को इस गाइडलाइन के बारे में नहीं पता है, यहां तक कि जो लोग इस रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहे थे, उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी। नैतिक आधार पर किसी को रक्तदान करने से रोकना उसके मानवाधिकार का हनन है।

जो लोग इस कैंप में शामिल हैं उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। रक्तदान एक सामाजिक जिम्मेदारी है, लिहाजा लिंग के आधार पर किसी को ऐसा करने से रोकना उसके मानवाधिकारों का हनन है। हम इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे।

वहीं इस मुद्दे पर मेडिकल बैंक ऑफ कोलकाता के सचिव डी आशीष का कहना है कि हम पूरे राज्य में रक्तदान शिविर का आयोजन करते हैं, अक्सर यह देखा गया है कि ट्रांसजेंडर को अधिकारी और सदस्य नजरअंदाज करते हैं।

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