बंगाल भर्ती घोटाला: मंत्री पद जाने के बाद बोले पार्थ चटर्जी- 'ये वक्त ही बताएगा.....'
नई दिल्ली, 29 जुलाई: ममता सरकार और उनकी पार्टी टीएमसी ने बंगाल शिक्षा भर्ती घोटाले में फंसे पार्थ चटर्जी का साथ छोड़ दिया है। गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग के बाद बंगाल सरकार ने उनको सभी पदों से हटा दिया। इसके बाद पार्टी ने भी ऐसी ही कार्रवाई की। इस मामले में अकेले पड़े पार्थ चटर्जी ने अब चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस साजिश में फंसाया जा रहा है। वहीं पार्टी ने निकाले जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये वक्त ही बताएगा...।

पार्थ चटर्जी करीब दो दशक तक टीएमसी के महासचिव रहे। उन्हें इस साल की शुरुआत में पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तो वहीं दूसरी ओर चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी भी गिरने से चोटिल हो गईं। उनके पैर में चोट लगने से उनको व्हीलचेयर से अस्पताल ले जाया गया। इससे पहले कोर्ट में पेशी के दौरान ईडी की उस कार का एक्सीटेंड हो गया था, जिसमें अर्पिता थीं। हालांकि उस हादसे में उनको चोट नहीं लगी थी।
दो छापेमारी में करोड़ों मिले
आपको बता दें कि ईडी ने सबसे पहले पार्थ चटर्जी के ठिकानों और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के यहां छापेमारी की थी। उस दौरान 21.90 करोड़ की नगदी, 56 लाख की विदेशी मुद्रा और 76 लाख का सोना बरामद हुआ था। इसके बाद बुधवार को दूसरी छापेमारी की गई। जिसमें 28.90 करोड़ रुपये की नगदी, 5 किलो सोना और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए।
तीन कंपनियां रडार पर
वहीं दूसरी ओर अर्पिता से फ्लैट से कैश मिलने के बाद अब ईडी की नजर उन कंपनियों पर है, जिससे पार्थ और अर्पिता का संबंध था। अभी तक की जांच में तीन कंपनियों का पता चला है, जिनकी जांच की जा रही है। इसके अलावा टीएमसी नेता कृष्णा कल्याणी को भी ईडी ने नोटिस भेजा है। साथ ही उनसे न्यूज चैनलों में उनकी कंपनी की ओर से दिए गए विज्ञापनों की जानकारी मांगी है।












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