कैसे बंगाल में जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्र की मौत पर हो रही है राजनीति?

पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी में रैगिंग की वजह से हुई छात्र की मौत के बाद इस मसले को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। सभी दल इस घटना का आकलन अपने-अपने सियासी चश्मे से कर रहे हैं।

कोलकाता पुलिस जहां एक तरफ जादवपुर यूनिवर्सिटी होस्टल में पहले वर्ष के छात्र स्वनोदीप कुंडु की मौत से पहले उसके साथ हुई घटनाओं की तह तक पहुंचने की कोशिशों में जुटी है, वहीं नेता अपनी सियासी लाइन के हिसाब से निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिशों में जुटे हुए लग रहे हैं।

politics over jadavpur university

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    सीएम ममता ने वामपंथी संगठनों को बताया जिम्मेदार
    सबसे बड़ा बयान राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी की ओर से आया है, जिन्होंने इस घटना को 'हत्या' बताते हुए इसके लिए वामपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहरा दिया है। उन्होंने कहा, 'सबने देखा है कि वामपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने किस तरह से फर्स्ट-ईयर के युवा छात्र की हत्या की है। हालात नहीं बदले हैं। इतनी सारी हत्याओं और इतना खून बहने के बावजूद वे नहीं बदले हैं। वे (वामपंथी) कभी नहीं बदलेंगे।'

    बीजेपी एनआईए से जांच की कर रही है मांग
    गौरतलब है कि एक तरफ बीजेपी जहां इस घटना की जांच एनआईए से करवाने की मांग कर रही है, वहीं विश्वविद्यालय में यूजीसी की गाइडलाइंस लागू करवाने पर भी जोर दे रही है। लेकिन, इस मसले पर प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर सोमवार को विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर भी जमकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

    दिलीप घोष ने राज्य प्रशासन को ठहराया कसूरवार
    दिलीप घोष ने रविवार को ऐसी घटनाओं के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे 'नपुंसक' कह दिया था। उन्होंने कहा था, 'जब बंगाल की 'नपुंसक' सरकार को उखाड़ फेंकेंगे, तब हम विवेकानंद की मूर्ति बनाएंगे और 'भारत माता की जय' के नारे लगाएंगे।' उन्होंने यहां तक आरोप लगाया था, 'एक छात्र की मौत के बाद हम जादवपुर यूनिवर्सिटी पर चर्चा कर रहे हैं। लेकिन, ऐसी मौतें तब तक होती रहेंगी, जब तक राज्य प्रशासन निष्क्रिय रहेगा।'

    टीएमसी बीजेपी की राजनीति पर भी उठा रही है सवाल
    जहां सीएम बनर्जी को जादवपुर यूनिवर्सिटी की घटना के लिए लेफ्ट को जिम्मेदार ठहराने में देर नहीं लगी, वहीं उनके शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु बीजेपी पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे। उन्होंने आरोप लगाया है कि 'जो लोग संस्थानों का भगवाकरण करना चाहते हैं, उसे बंगाल की जनता स्वीकार नहीं करेगी। कोई नहीं जानता कि घोष अगली बार सांसद रहेंगे भी या नहीं।'

    वहीं, सीपीएम के नेता सुजन चक्रबर्ती का दावा है कि बीजेपी नेता चर्चा में बने रहने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'वह पार्टी का पद गंवा चुके हैं और अब चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।'

    'अब जेएनयू में कोई लेनिन, स्टालिन या माओत्से तुंग नहीं रह गया है'
    दरअसल, रविवार की रात बैरकपुर में एक बैठक के दौरान बीजेपी नेता ने कहा था, 'हमने 'आजादी' (भारत तेरे टुकड़े होंगे वाली नारेबाजी) को जूतों के नीचे कुचल दिया है.......जेएनयू जाइए और देखिए कि कैसे हमने वहां शराब और गांजा रोक दिया है। अब वहां कोई लेनिन, स्टालिन या माओत्से तुंग नहीं रह गया है......जेएनयू से 'आजादी' के नारे को हटा दिया गया है। बल्कि, अब वहां स्वामी विवेकानंद की भव्य मूर्ति खड़ी है।'

    जादवपुर यूनिवर्सिटी में अल्ट्रालेफ्ट को नियंत्रित करना होगा- टीएमसी नेता
    घोष की दलील थी कि 'अगर जेएनयू में उन्हें नियंत्रण में लाया जा सकता है तो जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी उपद्रवी ताकतों को आसानी से नियंत्रण में लाया जा सकता है।' घोष के बयानों पर टीएमसी नेता अर्जुन सिंह का कहना है कि कुछ भी बयान देने की उनकी आदत रही है और इससे 'टीएमसी को फायदा' मिला है।

    लेकिन, साथ ही उन्होंने यह बात भी मानी है कि 'वैसे जादवपुर यूनिवर्सिटी में अल्ट्रालेफ्ट को नियंत्रित करना होगा। चाहे यह जेएनयू में हो या किसी भी दूसरी यूनिवर्सिटी में, यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।' इस तरह से इस मुद्दे पर लेफ्ट के खिलाफ कहीं न कहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस भी बीजेपी के साथ राइट में खड़ी दिख रही है। यह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए सियासी तौर पर काफी महत्वपूर्ण है।

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