पेगासस मामला: एक्टिव हुआ पश्चिम बंगाल का जांच आयोग, अखबारों में दिया ये पब्लिक नोटिस
कोलकाता, 5 अगस्त: पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए बीते महीने पश्चिम बंगाल सरकार ने आयोग का गठन किया था। जांच आयोग में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर और कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य शामिल हैं। अपने गठन के करीब 15 दिन बाद अब आयोग सक्रिय दिख रहा है। आयोग की ओर से गुरुवार को प्रमुख समाचार पत्रों में एक पब्लिक नोटिस जारी किया गया है। इसमें जनता और पेगासस मामले में स्टेकहॉल्डरों से आरोपों के बारे में जानकारी मांगी गई है।
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नोटिस में कहा गया है कि सभी व्यक्तियों, संस्थानों और संगठनों को बताया जाता है कि पेगासस मामले से संबंधित आयोग की कार्यवाही के लिए प्रासंगिक अपने बयान आयोग को व्यक्तिगत रूप से या मेल भेज सकते हैं। 30 दिन में ये बयान भेजने होंगे। मेल [email protected] पर किया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 26 जुलाई को कमीशंस ऑफ इंक्यावरी एक्ट, 1952 के तहत इस आयोग का गठन किया था। जिसे छह महीने में रिपोर्ट देनी है। पेगासस मामले पर जांच आयोग का गठन करने वाला पश्चिम बंगाल अभी तक अकेला राज्य है। यह आयोग पेगासस से अवैध हैकिंग, मॉनिटरिंग, सर्विलांस, फोन रेकॉर्डिंग वगैरह की जांच करेगा।
बीते महीने दुनिया भर की 17 मीडिया एजेंसियों ने अपनी वैश्विक जांच के आधार पर रिपोर्ट दी है कि भारत में कथित तौर पर 300 से ज्यादा हस्तियों के फोन हैक किए गए। केंद्रीय मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, कारोबारियों और अहम पदों पर बैठे सरकारी अधिकारियों की जासूसी की बात इसमें कही गई है। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर सहित कई पत्रकार भी शामिल हैं।
इस मामले को लेकर ससंद में भी काफी ज्यादा हंगामा देखने को मिल रहा है। इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि वो सिर्फ सरकारों को ही ये सॉफ्टवेयर बेचती है। ऐसे में विपक्ष का आरोप है कि सरकार ही ये जासूसी करा रही थी। ऐसे में सरकार इस पर संसद में बहस करे और जवाब दे। वहीं सरकार इस मुद्दे को गैरजरूरी कहकर टाल रही है।












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