मुकुल रॉय ने पकड़ा ममता दीदी का हाथ, सुवेंदु अधिकारी बने वजह
सुवेंदु अधिकारी की वजह से मुकुल रॉय ने पकड़ा ममता दीदी का हाथ, टीएमसी में की वापसी
कोलकाता, 11 जून। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे मुकुल रॉय की आज घर वापसी कर ली है। कई दिनों की अटकलों के बाद टीएमसी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय इस तरह से वापस दीदी के साथ हो जाएंगे, ये किसी ने नहीं सोचा था। ऐसे में सवाल उठता है कि मुकुल रॉय का भाजपा से इतनी जल्दी मोह भंग क्यों हो गया क्या इसकी वजह सुवेंदु अधिकारी हैं?

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बता दें मुकुल रॉय मंगलवार को राज्य भाजपा नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठक से भी गायब थे। मुकुल रॉय ने 2017 में टीएमसी छोड़ दिया था जिसके बाद भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। जब मुकुल रॉय को भाजपा में शामिल किया गया था तो उस समय जोर-शोर से यही कहा जा रहा था कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है तो मुकुल रॉय ही राज्य के अगले सीएम होंगे लेकिन 2021 आते-आते ही हालात एकदम से बदल गए और सुवेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के बाद तो मुकुल रॉय , भाजपा की मेन स्ट्रीम से गायब ही नजर आए। मीडिया रिपोर्टस में भी यही कहा गया कि सुवेंदु की वजह से भाजपा ने मुकुल रॉय को साइड लाइन कर दिया गया है।

गौरतबल है कि मुकुल रॉय ने TMC के दिग्गज नेता अभिषेक बनर्जी जो ममता बनर्जी के भतीजे भी है उनके साथ मतभेदों के चलते टीएमसी छोड़ा था, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने मुकुल राय को वो तवज्जो नहीं मिली जिसकी आशा उन्हें भाजपा से थी। पश्चिम बंगाल चुनाव ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी बन गया था। इसके अलावा विधानसभा चुनाव में मुकुल रॉय चुनाव प्रचार के दौरान तीसरे नंबर पर पहुंच गए पहले नंबर पर सुवेंदु अधिकारी ही रहे। एक जमाने में तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो की हैसियत रखने वाले मुकुल रॉय उसकी समय भाजपा में आकर पछता रहे थे। चुनाव के समय ही उन्होंने भाजपा के प्रचार में जाना बंद कर दिया था।

बता दें मुकुल रॉय के के कहने पर ही बाद में अर्जुन सिंह समेत अन्य टीएमसी के नेता भाजपा में शामिल हुए थे और अब माना जा रहा है कि मुकुल रॉय के बाद अन्य नेताओं की भी वापसी टीएमसी में होनी तय है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 से पहले ही वो टीएमसी में लौट जाना चाहते थे लेकिन क्योंकि दिलीप घोष से उनकी नहीं पटती थी। हालांकि, बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय से उनकी अच्छी बनती थी लेकिन चुनाव के समय ही कैलाश को ही किनारे लगा दिया गया है, जिससे मुकुल को अपना भविष्य सुरक्षित नहीं दिख रहा था और यह एक बड़ी वजह हो सकती है उनके घर वापसी की।

गौरतलब है कि चुनाव से पहले जब महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भाजपा को बंगाल विधानसभा में 294 में से 190 सीटें मिल सकती हैं। तब मुकुल रॉय ने कहा था कि "2021 के विस चुनाव कुल 294 सीटों में से भाजपा को 190 सीटें मिलने का अनुमान वास्तविकता से परे है"। मुकुल रॉय की बात चुनाव परिणाम आने पर सही साबित हुई।
बंगाल की राजनीति का चाणक्य कहे जाने वाले मुकुल रॉय ने जब भाजपा ज्वाइन की थी तो तब ये भी कहा जा रहा था कि उन्होंने नारदा घोटाले से बचने के लिए भाजपा का हाथ थामा था। अब जब कि नारदा घोटाले को लेकर फिर से सीबीआई ने अपनी पूछताछ तेज कर दी है और सोमवार को बंगाल सरकार के दो मंत्रियों समेत चार टीएमसी नेताओं के घर छापेमारी की, और चारों नेताओं से पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई जिस पर टीएमसी के नेताओं ने सवाल उठाया था कि टीएमसी नेताओं पर ही कार्रवाई क्यों हो रही है। भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय या सुवेंदु अधिकारी पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया। अब जबकि मुकुल रॉय भाजपा का साथ छोड़ चुके हैं तो देखना ये होगा कि फिर से टीएमसी नेता बने मुकुल रॉय को क्या ममता दीदी का हाथ थामने से क्या फायदा होगा और भाजपा मुकुल रॉय को कोई सबक सिखाती हैं कि नहीं।
वरिष्ठ पत्रकार प्रदु्म्मन तिवारी के अनुसार बंगाल में मुकुल रॉय का अपनी पुरानी पार्टी में जाना पहले से ही तय था। इसका प्रमुख कारण जिस उम्मीद से उन्होंने भाजपा ज्वाइन की वो पूरी नहीं हुई जबकि लोक सभा चुनाव 2019 में मुकुल रॉय की वजह से भाजपा को शानदार सफलता मिली थी लेकिन प्रदेश चुनाव में भाजपा में सुवेंदु के आने के बाद से साइड लाइन हो गए थे ऐसे में भाजपा में उन्हें अपना कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा था। टीएमसी में वापसी कर वो अपनी गलती को सुधार कर ममता बनर्जी के फिर से खास बनना चाहते हैं। इसके साथ ही बंगाल में भाजपा के वर्चस्व कम करने में मुकुल रॉय की वापसी टीएमसी के लिए फायदेमंद साबित होगी।












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