Mamata Banerjee: मुर्शिदाबाद दंगा, SSC स्कैम और परिवारवाद की तकरार, क्या दीदी का टीक पाना मुश्किल?
Mamata Banerjee: देश की राजनीति में प. बंगाल अभी हॉट टॉपिक बना हुआ है मुर्शिदाबाद में वक्फ बोर्ड को लेकर जिस तरह से दंगे हुए उसने पूरे देश का ध्यान अपनी खिंचा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस तक नहीं बख्शा, भीड़ ने गाड़ियों और दुकानों में आग लगाई इसमें 3 लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद से करीब 500 परिवारों ने मुर्शिदाबाद से पलायन कर लिया।
इस हिंसा को लेकर ममता सरकार सवालों के घेरे में है उन पर स्थिति को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लग रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार दंगाईयों के साथ थी और हिंसा से निपटने के लिए किसी तरह की कोई तैयारी नहीं की गई।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दीदी की पार्टी में टकराव बढ़ता जा रहा है और अब ये खुले तौर पर भी देखा जा सकता है। अब सवाल ये कि क्या दीदी इन तमाम चुनौतियों को पार करके 2026 विधानसभा चुनाव की नाव को किनारे लगा पाएंगी? आज के एक्सप्लेनर में इन सारे सवालों के जवाब विस्तार से जानेंगे....
Mamata Banerjee का 'दीदी' दांव खतरे में है?
मुर्शिदाबाद हिंसा में जिस तरह से स्थिति बिगड़ी उसमें ममता बनर्जी का दीदी वाला दांव भी खतरे में है। इस मामले में ममता बनर्जी पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल के अन्य इलाकों में वक्फ बिल को लेकर विरोध के कारण पहले से ही नाजुक माहौल बना हुआ था बावजूद इसके पुलिस आंख-कान बंद किए हुए थी।
ममता बनर्जी पर बीजेपी आरोप लगा रही हैं कि वो हिंदुओं की रक्षा करने में असफल रही है और कट्टरपंथियों को बढ़ावा दे रही हैं। अधीर रंजन चौधरी ने भी ममता को आडे़ हाथ लेते हुए कहा कि सरकार मुसलमानों को जिहादी कहने पर मजबूर कर रही है।
Mamata Banerjee TMC पार्टी के अंदरखाने में टकराव
ममता की सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के नेताओं का आपसी मनमुटाव है। हाल ही में जिस तरह से आंदरुनी कलह चैट लिक के माध्यम से बाहर आई उसने पार्टी की मजबूती पर भी सवाल खड़े कर रही है। चुनाव आयोग के वोटर ID को आधार से जोड़ने के विरोध में डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी समेत कई TMC सांसदों ने चुनाव आयोग के दफ्तर में ज्ञापन सौंपा। इसमें 13 सांसदों के दस्तखत थे लेकिन महुआ मोइत्रा को साइन नहीं करने दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से खबर आई कि इससे महुआ नाराज हो गई और इस पर उनकी और कल्याण बनर्जी के बीच बहस होने लगी। इस पूरे मामले को लेकर अमित मालवीय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वॉट्सएप चैट का स्क्रीन शॉट शेयर किया और इस पर मजे लिए।
बुआ भतीजे के बीच का मनमुटाव भी किसी से छुपा नहीं है। बीते कुछ समय में ममता बनर्जी और भतीजे अभिषेक बनर्जी के बीच भी टकराव देखा जा रहा है। पॉलटिकल विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों के बीच सीनियर बनाम यंग लिडर्स को लेकर झगड़ा चल रहा है। एक तरफ ममता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दे रही हैं वहीं अभिषेक का कहना है कि सीनियर लीडर्स को रिटायरमेंट ले लेना चाहिए।
SSC स्कैम पर चौतरफा घिरी TMC
बंगाल में एसएससी स्कैम पर जिस तरह से कार्रवाई हुई और 25 हजार शिक्षकों की नौकरियां रद्द की गई उससे ममता सरकार को बड़ा झटका लगा। इसके बाद ED ने 23 जुलाई, 2022 को राज्य शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया और CBI ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शिकायत दर्ज की।
इस मामले पर कोलकाता हाईकोर्ट ने आदेश दिया जिसे सुप्रिम कोर्ट में चुनौती दी गई जिस पर स्टे ऑर्डर लग गया। इसके विरोध में हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए। हालांकि, ममता ने इस मामले पर कहा कि हम कोर्ट का ये आदेश नहीं मानेंगे, जब तक मैं जिंदा रहूंगी तब तक किसी की नौकरी नहीं जाने दूंगी।
क्या 2026 में Mamata Banerjee को होगा बड़ा नुकसान?
2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में उठापटक तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों के दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी की छवि को चोट पहुंचाई है, और इससे उनके मजबूत माने जाने वाले मतदाता वर्ग..मध्यम वर्ग में असंतोष फैलने लगा है।
प. बंगाल में आम जनता का प्रशासनिक फैसलों में मोह भंग होते जा रहा है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की कमी और हाल के घोटालों ने मध्यम वर्ग में भारी निराशा पैदा की है, जो पहले पार्टी का मजबूत आधार रहा है।
एक और बड़ी चिंता है जनता का बढ़ता असंतोष, जो अब केवल सोशल मीडिया या निजी बातचीत तक सीमित नहीं रह गया है। सड़कों पर उतरकर शिक्षक और सरकारी कर्मचारी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, और यह विरोध-प्रदर्शन आम लोगों से समर्थन भी हासिल कर रहे हैं। आरजी कर रेप केस जैसे संवेदनशील मामलों ने प्रशासन पर भरोसे को और कमजोर किया है।
विश्लेष्णों का मानना है कि अगर दीदी को सत्ता में बने रहना है तो आम जनता का भरोसा जितना होगा विशेषकर चुनावी साल में यदि कोई दूसरा बड़ा जनविरोध खड़ा होता है, तो TMC को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं बीजेपी के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है। पार्टी लंबे समय से बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और यदि TMC की स्थिति डगमगाती है, तो बीजेपी आक्रामक रणनीति के साथ वापसी करने की तैयारी में है। 2021 के विधानसभा चुनाव में बढ़े हुए जनसमर्थन ने बीजेपी को यह विश्वास दिलाया है कि वह ममता के किले में सेंध लगा सकती है।
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