'झगड़े में अंडकोष को दबाना हत्या का प्रयास नहीं', कर्नाटक हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा भी घटाई
Karnataka High Court: निचली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बड़ा बदलाव किया। आरोपी की सजा को 4 साल कम दिया है।
Karnataka High Court: झगड़े के दौरान एक व्यक्ति के अंडकोष (वृषण) दबाने के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट (एचसी) ने मंगलवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी का पीड़ित की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। चोट लड़ाई के दौरान लगी थी। ऐसे में इसे हत्या का प्रयास नहीं कहा जा सकता है।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने आरोपी की सजा 7 साल से कम करके तीन साल की कर दी। हाई कोर्ट ने यह फैसला निचली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया है।

एचसी ने तर्क दिया कि आरोपी का पीड़ित की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था और चोट लड़ाई के दौरान लगी थी। हालांकि, चोट के कारण पीड़ित की मृत्यु हो सकती है, लेकिन आरोपी का इरादा ऐसा नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आरोपी का हत्या का प्लान होता तो हत्या करने के लिए अपने साथ कुछ घातक हथियार भी साथ लाया होता।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल मामला 2010 का है। चिक्कमगलुरु जिले में नरसिम्हा स्वामी' जुलूस के आयोजन के दौरान ओंकारप्पा नाच रहे थे। तभी परमेश्वरप्पा मोटरसाइकिल से मौके पर पहुंचा और ओंकारप्पा से झगड़ा करने लगा। लड़ाई के दौरान, परमेश्वरप्पा ने ओमकारप्पा के अंडकोष को दबा दिया, जिससे उसे गंभीर चोट आई। मामला सर्जरी तक जा पहुंचा। ओमकारप्पा की शिकायत पर मामला निचली कोर्ट में पहुंच गया।
साल 2012 में आरोपी परमेश्वरप्पा को दोषी ठहराते हुए धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास में 7 साल जेल की सजा सुनाई गई। इसके बाद आरोपी ने परमेश्वरप्पा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।












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