बंगाल के दो जिलों के पास है सत्ता की चाबी, TMC को दोनों बार मिली बंपर सीट

कोलकाता: बीजेपी इसबार बंगाल में टीएमसी से सत्ता छीनने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। लेकिन, यहां दो ऐसे जिले हैं, जिसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाली पार्टी को ही कोलकाता में सत्ता शिखर तक पहुंचते देखा गया है। ये दोनों जिले हैं, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जहां पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में से 64 सीटें हैं। उत्तर 24 परगना में 33 विधानसभा सीटें हैं और दक्षिण 24 परगना में 31 सीटें। पिछले दोनों विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को इन जिलों ने बंपर सीटें देकर सिंहासन पर बैठने का रास्ता साफ कर दिया था। लेकिन, पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां भी दस्तक दे दी है और ऊपर से फुरफुरा शरीफ वाले अब्बास सिद्दीकी अलग से ताल ठोक रहे हैं।

दो चुनावों से दोनों जिलों में चला है तृणमूल का सिक्का

दो चुनावों से दोनों जिलों में चला है तृणमूल का सिक्का

2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को उत्तर 24 परगना की 33 में से 27 और दक्षिण 24 परगना की 2 सीटें छोड़कर बाकी सभी 29 पर जीत मिली थी। इसमें से दक्षिण 24 परगना तो पूरी तरह से मुस्लिम-बहुल इलाका है। 2919 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर 24 परगना में तो टीएमसी के गढ़ में सेंध लगा दी थी, लेकिन दक्षिण 24 परगना फिर भी उससे दूर ही रह गया था। राज्य के मंत्री और टीएमसी के उत्तर 24 परगना के जिलाध्यक्ष ज्योतिप्रियो मलिक के मुताबिक, 'इसबार भी सत्ता पर काबिज रहने के लिए दोनों जिलों की सीटों पर जीतना अहम है। आम चुनाव के दौरान बीजेपी ने धमकी के सहारे कुछ इलाकों में पैठ बना ली थी। लेकिन, हमने भगवा पार्टी को रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाए हैं।' इनकी बातों पर हामी भरते हुए दक्षिण 24 परगना में उनकी ही पार्टी में उनके समकक्ष सुभाशीष चक्रवर्ती ने कहा है कि वोटर 'विभाजनकारी ताकतों' को नकार देंगे और टीएमसी इस इलाके में मजबूत बनकर उभरेगी।

2008 में ही टीएमसी ने यहां बना ली थी अपनी जमीन

2008 में ही टीएमसी ने यहां बना ली थी अपनी जमीन

ये दोनों जिले बंगाल के वो इलाके हैं, जिसके बीच में राजधानी कोलकाता है और इनकी सीमाएं बांग्लादेश से लगने की वजह से यहां शरणार्थियों की भी बड़ी आबादी है। पहले मुस्लिम-बहुल यह इलाका वामपंथियों का गढ़ माना जाता था। लेकिन,2008 में सच्चर समिति ने यहां रहने वाले मुसलमानों की हालत की ऐसे तस्वीर पेश की कि लेफ्ट की यहां से जमीन ही उखड़ गई। संयोग से उसी दौरान हुए सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलनों ने उन्हें टीएमसी के रूप में एक नया प्लेटफॉर्म दिया और वो ममता बनर्जी के साथ हो लिए। यही वजह है कि दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर वो पहले दो जिले हैं, जहां के जिला परिषदों से 2008 में टीएमसी ने सबसे पहले लेफ्ट को बेदखल किया था।

2019 के लोकसभा चुनाव से भाजपा ने की एंट्री

2019 के लोकसभा चुनाव से भाजपा ने की एंट्री

लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी की जमीन में दरार पड़ती दिखाई पड़ी और उत्तर 24 परगना की 5 में से 2 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने भगवा फहरा दिया। इसकी वजह ये मानी गई कि बीजेपी ने नागरिकता संशोधन कानून का चुनावी वादा किया था। इस इलाके में जो शरणार्थियों की आबादी है, उसमें मतुआ समुदाय भी बहुत प्रभावी है और यहां की 33 में से 14 सीटों पर हार-जीत का फैसला वही करते हैं। लेकिन,इसके ठीक उलट दक्षिण परगना में तब भी भाजपा तृणमूल का कुछ भी नहीं बिगाड़ पायी। लेकिन, इसबार ममता की चुनौती उन नेताओं की वजह से भी बढ़ गई है, जो उसका साथ छोड़ चुके हैं। इनमें इन दोनों जिलों के 5 टीएमसी विधायक भी शामिल हैं। भाजपा के लिए उत्साहित होने वाली बात एक ये भी है कि उत्तर 24 परगना की भटपारा सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव में भी उसके प्रत्याशी पवन कुमार सिंह को जीत मिली थी।

दक्षिण 24 परगना में भी बदल चुके हैं हालात

दक्षिण 24 परगना में भी बदल चुके हैं हालात

उत्तर 24 परगना में भाजपा के बढ़ते प्रभाव ने इसबार भी ममता के लिए चुनौती खड़ी कर रखी है तो दक्षिण 24 परगना में फुरफुरा शरीफ वाले मौलवी के इंडियन सेक्युलर फ्रंट ने अलग नींद उड़ा रखी है। मुसलमानों की भारी आबादी की वजह से इस इलाके को अब्बास सिद्दीकी का गढ़ बताया जाता है, जो पहले टीएमसी का समर्थन करते थे। आईएसएफ के अध्यक्ष नौशाद सिद्दीकी जो कि खुद भंगोर विधानसभा सीट से प्रत्याशी भी हैं उनका कहना है, 'टीएमसी ने अल्पसंख्यकों (मुसलमानों) के लिए कुछ नहीं किया है और दक्षिण 24 परगना जिले में उनको मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।' इसके अलावा तृणमूल पर इलाके में घुसपैठ को बढ़ावा देने, मवेशियों की तस्करी और अम्फान तूफान राहत में गड़बड़ी के भी आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, टीएमसी के पास अभी भी यहां मजबूत संगठन है, जिसके दम पर वह सभी चुनौतियों का मुकाबला कर सकती है।

आधी से ज्यादा सीटें जीतने का है भाजपा को भरोसा

आधी से ज्यादा सीटें जीतने का है भाजपा को भरोसा

जहां तक उत्तर 24 परगना की बात है तो तृणमूल यहां पर नागरिकता संशोधन कानून पर असमंज की स्थिति का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, जिसके दम पर भाजपा ने लोकसभा में मतुआ समुदाय का भरपूर साथ पाया था। इसके साथ ही उसने एंटी-इंकम्बेंसी को टालने के लिए यहां कई उम्मीदवारों को भी बदला है। वैसे बीजेपी को उम्मीद है कि वह इन चुनौतियों के बावजूद इन दोनों जिलों की आधी से ज्यादा सीटें जीत लेगी। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है, 'अगर ज्यादा नहीं तो उत्तर 24 परगना में 60 फीसदी सीटें जीतने में सफल होंगे। दक्षिण 24 परगना में भी हम अच्छा करेंगे, कम से कम 50 फीसदी सीटें तो हमारे पास जरूर होंगी।'

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