WB Assembly Elections 2021: 5 'M' फैक्टर का चला बंगाल में जादू, बदल गई सियासी तस्वीर
कोलकाता, 03 मई। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने शानदार वापसी की है, उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीत कर इतिहास रच दिया है तो वहीं राज्य में 200 सीटें जीतने का दावा करने वाली भाजपा के खाते में मात्र 77 सीटें आई हैं। ममता बनर्जी की जीत इस बार कई मायनों में खास है। पहली बात तो ये कि वो तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापस आई हैं तो वहीं दूसरी ओर एक महिला नेत्री के रूप में ममता ने सियासत के कैनवेस पर अपने नेतृ्व की एक नई आकृति को उकेरा है। हर चुनावी रैली में उनका आक्रोशित रूप, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को खुले मंच से तीखे शब्दों में चुनौती देना और 40 डिग्री के पारे में व्हीलचेयर पर बैठकर पदयात्रा करना , ममता बनर्जी को, दूसरे नेताओं से बिल्कुल अलग करता है।

5'M' फैक्टर का चला बंगाल में जादू
वैसे बंगाल के इस चुनाव में M फैक्टर ने जबरदस्त कमाल किया है, उसी ने आठ चरणों में हुए मैराथन बंगाल चुनाव को शुरू से अंत तक रोचक बनाए रखा और ये 5 M फैक्टर हैं- मोदी, ममता, मुस्लिम, महिला और मतुआ। जिनकी वजह से टीएमसी और भाजपा दोनों का सियासी नक्शा इस चुनाव में बदल गया।

पहला M मतलब मोदी
सबसे पहले बात M यानी कि पीएम मोदी की ,जिन्होंने बंगाल चुनाव में बैक टू बैक ताबड़तोड़ रैली की और जमकर ममता सरकार पर निशाना साधा, जिसका नतीजा ये हुआ कि पिछले चुनाव में मात्र 3 सीटें पाने वाली भाजपा आज 80 के करीब पहुंच गई। भले ही बीजेपी चुनावी रैलियों में किए अपने 200 सीटों के वादे को पूरा नहीं कर पाई लेकिन इसमें कोई शक नहीं उसने बंगाल में इस बार हैरतअंगेज काम किया है, जिसका श्रेय M फैक्टर यानी कि मोदी को ही जाता है।

दूसरा M मतलब ममता बनर्जी
अब बात दूसरे M फैक्टर यानी की ममता बनर्जी की, जिन्होंने बंगाल में हैट्रिक पूरी की है। लेफ्ट का लाल किला ढहाने वाली ममता बनर्जी ने पूरे चुनाव में अकेले मोर्चा संभाला था। उनके दिग्गज नेताओं ने पार्टी छोड़ी लेकिन ममता टस के मस ना हुईं। उन्होंने नंदीग्राम से चुनाव लड़कर सुवेंदु अधिकारी, जो कि कभी उनके काफी करीबी हुआ करते थे, को सीधे चुनौती दी। हालांकि वो वहां से जीत तो नहीं पाई लेकिन उनकी पार्टी ने राज्य में जीत का परचम लहरा दिया, जिसका श्रेय ममता बनर्जी को ही जाता है।

तीसरा M मतलब महिलाएं
अब बात तीसरे M फैक्टर यानी की महिलाओं की, ममता बनर्जी को शुरू से महिलाओं का सपोर्ट रहा है। तीन तलाक हो या फिर शराब बंदी, ममता बनर्जी ने हमेशा से ही खुद को महिलाओं के हमदर्द के रूप में पेश किया है। जिसका फायदा उनका हर चुनाव में मिलता रहा है और इस बार भी मिला। वूमन पॉवर का शानदार उदाहरण पेश करने में ममता पूरी तरह से सफल रहीं, उनकी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने जमकर चुनाव प्रचार किया और असर उसका आज दिख रहा है।

चौथा M मतलब मुस्लिम
अब बात चौथे लेकिन सबसे अहम M फैक्टर यानी कि मुस्लिमों की, अगर बीजेपी ने हिंदूत्व का राग अलापा, तो ममता ने खुले तौर पर एनआरसी और सीएए की बात छेड़कर मुस्लिमों को अपना साथी बताया, जिसका नतीजा ये हुआ कि राज्य के मुस्लिमों ने उन पर भरोसा किया, यहां तक कि उन्हें कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से ज्यादा दीदी अपनी लगी और उन्होंने खुलकर ममता बनर्जी का साथ दिया।

5वां M मतलब मतुआ जाति
अब बात अंतिम लेकिन बहुत महत्वपूर्ण M फैक्टर यानी कि मतुआ जाति की, जिनकी 30 लाख की आबादी इस वक्त बंगाल में है। मतुआ जाति के लोग करीब साल 1950 से पाकिस्तान और बांग्लादेश से पलायन करके बंगाल में आकर बसे हैं। ये अनुसूचित जाति वर्ग CAA की वजह से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था और ऐस में उसे ममता दीदी ही हमदर्द और रक्षक के रूप में नजर आईं और उसने उनका साथ देकर बंगाल का सियासी रंग हरा कर दिया।
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