Vidisha News: आग बरसती गर्मी में सड़क पर लेटकर कलेक्ट्रेट पहुंचे अन्नदाता, हाथों में पड़ गए छाले, इंसाफ की गुहार
जिला विदिशा के रहने वाले 2 किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय में कलेक्टर को भगवान मानकर न्याय की गुहार लगाने पहुंचे। इस दौरान दोनों किसानों ने स्वामी विवेकानंद चौराहे से कलेक्टर ऑफिस तक तपती धूप में सड़क पर लेटकर पिंड भरें।

Vidisha Shamshabad News: शमशाबाद के खजूरी गांव के दो अन्नदाताओं ने कलेक्टर से गुहार लगाने के लिए स्वामी विवेकानंद चौराह से पिंड भरना शुरू किया, जबकि वहां पारा दोपहर को 41 डिग्री सेल्सियस चल रहा था। तपती धूप में दोनों ग्रामीण कलेक्टर पहुंचे और वहां कलेक्टर के पैर पकड़कर कहा कि हम कलेक्टर को भगवान मान रहे हैं इसलिए मन्नत लेकर यहां तक आए हैं। हालांकि बीच में पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने उठाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण अपने कर्तव्य पर अडिग रहे।
क्या है मामला?
बता दें कि जमीन के दो पक्षों का मामला राजस्व न्यायालय में चल रहा है और उक्त जमीन का स्थगन आदेश होने के बावजूद क्षेत्र के पटवारी ने राजस्व न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर जमीन की नपती करवा दी, जिससे पीड़ित 2 किसानों ने न्याय के लिए स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई और सुनवाई नहीं होने पर वह जिला मुख्यालय पर आए और स्वामी विवेकानंद चौराहे से कलेक्ट्रेट तक तपती धूप में पिंड भरते हुए ( सड़क पर लेटकर) कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रशासन को इसकी जानकारी लगने पर तुरंत तहसीलदार सरोज अग्निवंशी अपने कार्यालय से बाहर आई और उन्होंने तथा उनके स्टाफ ने वहां पहुंच कर दोनों ग्रामीणों की समस्याएं सुनी।
डरा धमकाकर कोरे कागज पर करा लिए हस्ताक्षर
ग्राम खजूरी की रहने वाले गोपाल सिंह यादव ने तहसीलदार को बताया कि उनकी जमीन पर कुछ दबंग लोग कब्जा करना चाहते हैं। जिसका मामला राजस्व न्यायालय में चल रहा है और 18 मई तक का स्टे उनके पास था। इसके बावजूद 12 मई को उक्त स्टे वाली जमीन पर बगैर सीमांकन आदेश कराए और बगैर कोई सूचना या न्यायालय की तामिली के ही दबंगों ने उक्त भूमि का सीमांकन पटवारी से करवा लिया। इसके बाद तहसील में बुलाकर डरा धमकाकर कोरे कागज पर हस्ताक्षर भी करवा लिए और जमीन पर कब्जा कर लिया। मामले की शिकायत उन्होंने स्थानीय प्रशासन से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने के कारण वे यहां जिला मुख्यालय पर आए और चौराहे से पिंड भरते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे।
हाथों में पड़ गए थे छाले
दोनों ग्रामीण स्वामी विवेकानंद चौराहा से कलेक्ट्रेट तक तेज धूप में और गर्म सड़क पर पिंड भरते हुए पहुंचे, तो उनके हाथों में छाले पड़ गए थे, जिन्हें देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत कलेक्टर से की तो कलेक्टर ने उनकी समस्याएं सुनने के बाद शमशाबाद SDM से फोन पर चर्चा की। दोनों ग्रामीणों के दस्तावेज लिफाफे में रखकर एसडीएम को देने की बात कही और कहा कि उन्हें हर संभव मदद वे दिलाएंगे।
प्रशासन निर्णय लेने में सक्षम हो तो ना बने ऐसे हालात
ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब ग्रामीण क्षेत्रों से आए अन्नदाताओं को शासन-प्रशासन से अपनी मांग पूरी करवाने के लिए पिंड भरना पड़े हो। इससे पहले भी कई बार जनसुनवाई में आए पीड़ितों ने आग लगाने का प्रयास किया और अपने ऊपर तेल डाल लिया, यह वे लोग थे जो कहीं ना कहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं थे। हाल में ही कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट कार्यालय में ही मां-बेटे जनसुनवाई के दौरान पिंड भरते हुए आए थे। यदि प्रशासन सक्रिय हो और वह निर्णय लेने की क्षमता रखता हो तो कभी ऐसे हालात नहीं बने। शमशाबाद के इस मामले में देखा जाए तो पटवारी द्वारा जमीन गलत चढ़ाने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाया गया है। समय रहते शिकायतकर्ता ने कई बार आवेदन दिए, लेकिन उस उन पर कार्यवाही नहीं होना सरकारी मुलाजिमों की कार्यप्रणाली ऊपर उंगली उठाता है। लेकिन इसके बाद भी सरकारी वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारी गंभीर नहीं होते कई ऐसे मामले भी सामने आए जहां राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी हो जाती है और वरिष्ठ अधिकारी छोटे अधिकारियों को बचा लेते हैं। शिकायतकर्ता चिल्ला चिल्ला कर चुप बैठ जाता है।
तहसीलदार सरोज अग्निवंशी ने दी सफाई
वहीं इस मामले में तहसीलदार सरोज अग्निवंशी ने कहा कि मुझे जैसी जानकारी लगी कि कोई दो ग्रामीण पिंड भरते हुए कलेक्ट्रेट आ रहे हैं, तो मैं स्वयं तुरंत अपने स्टाफ के साथ उनके पास पहुंची और उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने बताया कि उनकी जमीन का राजस्व न्यायालय में केस चल रहा है। उनके पास जमीन का स्थगन आदेश भी है। इसके बावजूद जमीन की नपती आदि कर दी गई। इस मामले में उन्होंने कलेक्टर को अवगत कराया तो उन्होंने इसे संज्ञान में लिया और पीड़ितों की बात सुनने के साथ ही उनकी हर संभव मदद का आश्वासन उन्हें दिया।












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