काशी के घाटों को 'गोद' लेंगी देश की टॉप कंपनियां

मोदी के संसदीय क्षेत्र के दर्जन भर घाटों को एक ट्रायल के लिए चुना गया है। इसके तहत देश की टॉप कंपनियों साफ-सफाई और रखरखाव के लिए इन घाटों को 'गोद' लेंगी। इस योजना के तहत घाटों की मरम्मत से लेकर उनके रख रखाव की पूरी जिम्मेदारी इन कंपनियों की होगी। यह अभियान विशेष तौर पर उन घाटों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जहां विदेशी सैलानियों का ज्यादा आना-जाना है।
टूरिजम मिनिस्टर श्रीपद नायक ने अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस अभियान का मकसद घाट की साफ-सफाई में अहम प्राइवेट कंपनियों को शामिल करना है। उनके मुताबिक वाराणसी के घाटों की साफ-सफाई और रख-रखाब करना कंपनियों की कॉर्पोरेशन सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का हिस्सा होंगी। इस प्लानिंग के तहत कंपनियां किसी खास घाट की देखरेख और सफाई का काम करेंगी और इसके बदले सरकार उन्हें विज्ञापन की खातिर घाट पर ही स्पेस मुहैया करा सकती है।
कंपनियां ये काम वाराणसी म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर करेगी। टूरिजम मिनिस्ट्री के अधिकारियों के मुताबिक इस योजना की शुरूआत 12 घाटों पर ट्रायल के साथ किया जाएगा। इन घाटों में दशाश्वमेध, राजेंद्र प्रसाद, शीतला, केदार, मन मंदिर, त्रिपुरभैरवी, विजयनगरम, राणा, चौसट्टी, मुंशी, अहिल्याबाई और दरभंगा घाट शामिल हैं।
आपको बता दें कि काशी विश्वनाथ से करीब होने के कारण दशाश्वमेध घाट पर सबसे ज्यादा लोग आते-जाते हैं और हर शाम यहां होने वाली गंगा आरती काफी मशहूर है। इसी घाट से मोदी ने ऐलान किया था कि उनकी प्राथमिकता इस शहर और बाकी देश को साफ करने की होगी। अब तक जिन कंपनियों ने इन घाटों की सफाई की जिम्मेदारी लेने में दिलचस्पी दिखाई है उसमें ताज और ललित होटल ग्रुप के अधिकारी भी शामिल हैं। टाटा की अगुवाई वाले ताज ग्रुप ने जहां इस पहल के बार में पुष्टि की है, वहीं ललित ने कोई भी जवाब नहीं दिया।












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