US Tariff: इंडियन मार्केट पर खतरा! दोबारा टैरिफ लगाएंगे ट्रंप? किन सेक्टर्स में जाएंगी नौकरी-किसे होगा नुकसान?
America Tariff: अमेरिका ने भारत समेत 53 देशों को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने बुधवार को सेक्शन 301 की रिपोर्ट जारी की, जिसमें इन देशों पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ यानी आयात टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने ऐसे उत्पादों पर प्रभावी कार्रवाई भी नहीं की।
भारत-अमेरिका ट्रेड टॉक के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इस वक्त अमेरिकी मुख्य वार्ताकार नई दिल्ली में हैं और भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिनों तक बातचीत कर रहे हैं। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटे हैं। कुछ दिन पहले एक अधिकारी ने बताया था कि भारत की कोशिश रहेगी कि उसे इस सेक्शन 301 जांच से राहत मिले और उसके ऊपर दूसरे देशों की तुलना में कम टैरिफ लगाया जाए।

समझौता करना है, लेकिन बराबरी की शर्तों पर- भारत
एक अधिकारी के मुताबिक भारत व्यापार समझौते को लेकर पॉजिटिव है। लेकिन उसकी शर्त साफ है। भारत चाहता है कि समझौता "ट्रांसपेरेंट, जस्टिफाइड और बैलेंस" हो। यानी दोनों देशों को बराबर फायदा मिले और किसी एक पक्ष पर ज्यादा बोझ न पड़े। सूत्रों का कहना है कि अगर समझौते की रूपरेखा तय हो जाती है तो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर जल्द ही भारत का दौरा कर सकते हैं।
भारत ने आरोपों को सिरे से खारिज किया
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने जबरन मजदूरी से जुड़े सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से कहा है कि इस जांच को बंद किया जाए। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों को एकतरफा कार्रवाई के जरिए नहीं बल्कि चल रही ट्रेड टॉक के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। भारत का तर्क है कि बातचीत के रास्ते समाधान निकाला जा सकता है, न कि एक्स्ट्रा टैरिफ लगाकर।
आखिर क्या है सेक्शन 301?
अब सवाल उठता है कि यह सेक्शन 301 आखिर है क्या? दरअसल, यह अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 का हिस्सा है। इसे अमेरिका का एक बड़ा व्यापारिक हथियार माना जाता है। इस कानून के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को अधिकार है कि वह किसी भी देश की व्यापार नीतियों और नियमों की जांच करे। अगर अमेरिका को लगता है कि कोई देश अनुचित तरीके से व्यापार कर रहा है या अमेरिकी कारोबार को नुकसान पहुंचा रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
भारत पर क्या होगा असर?
फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली ने वनइंडिया को बताया कि
"अमेरिका जिस सेक्शन 301 के तहत भारत पर जो टैरिफ लगाने की कोशिश की है। इस सेक्शन में की गई जांच में कहीं भी ये नहीं पाया गया कि भारत चाइल्ड लेबर का इस्तेमाल कर रहा था। इसलिए ट्रंप इसे सिर्फ एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भारत के कपड़ा उद्योग, जेम्स एंड जूलरी, और फार्मा सेक्टर को नुकसान जरूर होगा और जॉब्स भी जा सकती है। लेकिन अमेरिकी बाजारों को इससे ज्यादा झटका लगेगा। इससे अमेरिका में ज्यादा महंगाई आएगी।" Pakistani राजदूत ने किया Japan में मस्जिद का किया उद्घाटन, अब उसी पर चलेगा बुलडोजर, क्यों भड़की जापानी सरकार?किन देशों को मिलेगी थोड़ी राहत?
USTR ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुछ देशों को राहत मिल सकती है। ऐसे देश जिन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, या ऐसा करने का वादा किया है, उनके लिए अतिरिक्त टैरिफ की दर 10 फीसदी रखने का प्रस्ताव दिया गया है। यानी अगर किसी देश ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो उसे बाकी देशों की तुलना में कम टैरिफ देना पड़ सकता है।
ट्रम्प के पुराने एजेंडे की वापसी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे अलग-अलग देशों पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाना चाहते हैं।
कब लागू होगा नया टैरिफ
हालांकि जिन देशों का नाम इस सूची में आया है, उन्हें फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।अमेरिकी एजेंसी ने साफ किया है कि नए टैरिफ तुरंत लागू नहीं होंगे। इससे पहले एक लंबा एनालिटिकल प्रोसेस होगा। इस दौरान उद्योग जगत, व्यापार संगठनों और अन्य पक्षों से राय मांगी जाएगी। इसके बाद नियमों में बदलाव भी किया जा सकता है। जुलाई में होगी सार्वजनिक सुनवाई USTR के नोटिस के मुताबिक 6 जुलाई तक लिखित सुझाव और टिप्पणियां जमा की जा सकती हैं।इसके बाद 7 जुलाई से सेक्शन 301 पैनल सार्वजनिक सुनवाई शुरू करेगा। इसमें विभिन्न पक्ष अपने तर्क और सुझाव रख सकेंगे।
भारत पर क्या आरोप हैं?
USTR की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उसे लागू करने में विफल रहा है। अमेरिकी एजेंसी का दावा है कि यह स्थिति अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह है और इसे "अनुचित व्यापारिक व्यवहार" माना जा सकता है।इसी वजह से भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है जिन पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।
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