Varanasi News: नौ जुलाई को वाराणसी में हरियाली का उत्सव, लगाए जाएंगे कत्था, शहतूत और अर्जुन के पौधे
Varanasi News: वाराणसी में इस वर्ष वर्षाकाल के दौरान 18 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। राज्य के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने अभियान को हर हाल में सफल बनाने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने रविवार को सर्किट हाउस सभागार में अधिकारियों के साथ वृक्षारोपण कार्यक्रम की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि नौ जुलाई को वृहद वृक्षारोपण अभियान प्रस्तावित है, जिसमें शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करना अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि हर पौधे की सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित हो। इसके लिए विधायक निधि से दो हजार ट्री गार्ड की व्यवस्था कराई जा रही है।
हर विभाग को सौंपी गई जिम्मेदारी
बैठक में सभी विभागों को उनके पौधारोपण लक्ष्य की जानकारी दी गई और तत्काल आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि सोमवार सुबह तक सभी विभाग पौधों का उठान सुनिश्चित करें।
विभागीय अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि वृक्षारोपण की जियो टैगिंग शत-प्रतिशत हो। इससे हर पौधे की निगरानी डिजिटल माध्यम से संभव होगी और उनके रखरखाव पर नजर रखी जा सकेगी।
पौधारोपण को जन अभियान बनाने की कोशिश
मंत्री ने कहा कि इस अभियान में सिर्फ अधिकारी ही नहीं, आम जनता की भी भागीदारी होनी चाहिए। रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि रजिस्ट्री कराने आए हर व्यक्ति को पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जाए।
इसके साथ ही जीएम डीआईसी को उद्यमियों को वृक्षारोपण में भाग लेने और ट्री गार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सरकार चाहती है कि यह अभियान एक सामाजिक आंदोलन बने।
स्कूलों और गौशालाओं में भी होंगे पौधारोपण
शहर के हर स्कूल में दो सहजन के पौधे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। सहजन पौष्टिकता के लिहाज से उपयोगी है, जो बच्चों के आहार में लाभकारी भूमिका निभा सकता है।
पशुपालन विभाग को निर्देशित किया गया है कि गौशालाओं की भूमि पर नीम के पौधे लगाए जाएं। साथ ही, ऊर्जा, हाइडिल और सहकारिता विभागों को भी वृक्षारोपण में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।
कृषि विभाग को सलाह दी गई है कि किसान अपने खेतों की मेड़ों पर यूकेलिप्टस, शीशम और कत्था के पौधे लगाएं। बागवानी विभाग को कत्था के पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
काशी में कत्था और रेशमी वस्त्रों की मांग को देखते हुए शहतूत और अर्जुन जैसे पौधे भी लगाए जाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्थानीय ज़रूरत और पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही पौधों का चयन हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि वृक्षारोपण हमारी परंपरा का हिस्सा है। पीपल और नीम जैसे वृक्ष न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। वृक्ष बचाना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।












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