60 सालों से हर रोज आधा किलो तक बालू खाती हैं ये महिला, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
60 सालों से हर रोज आधा किलो तक बालू खाती हैं ये महिला, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
वाराणसी, 26 नवंबर: 75 वर्षीय कुसुमावती देवी अपने एक अजीबोगरीब हुनर की वजह से इन दिनों चर्चाओं में आ गई है। जी हां..कुसुमावती देवी के हुनर और इसके पीछे के कारण को जानने का बाद आप भी हैरान हो जाएंगे। दरअसल, कुसुमावती देवी हर रोज एक पाव से आधा किलो तक बालू (रेत) खाती है।
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पिछले 60 सालों से खाती हैं बालू
जी हां...ये सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा कि कोई कैसे बालू खा सकता है। लेकिन ये सच है। कुसुमावती देवी की यह आदत कोई आज से नहीं, बल्कि पिछले 60 सालों से हैं। कुसुमावती देवी ने अपनी इस आदत के पीछे जो वजह वो भी बताई। कुसुमावती देवी ने बताया कि जब वो 18 साल की थीं, तो एक वैद्य के कहने पर कंडे की राख खाना शुरू किया था, जो धीरे-धीरे बालू में बदल गया।

साफ करके बनाती हैं खाने योग्य
हालांकि, बालू (रेत) खाने के बाद भी कुसुमावती देवी पूरी तरह से स्वस्थ और निरोग हैं। ग्रामीण बताते है कि कुसुमावती देवी सुबह चाहे नाश्ता भले न करती हों, लेकिन समय से बालू जरूर खाती हैं और वो भी गंगा का। बालू का इंतजाम भी बकायदा कुसुमावती के नाती-पोते करते हैं और यह उसे धोकर साफ करती हैं और खाने योग्य बना लेती हैं।

पोल्ट्री फार्म चलाती हैं कुसुमावती देवी
कुसुमावती देवी इलाके के लिए तो आश्चर्य है ही, साथ ही वो अपनी निरोगता के लिए भी काफी जानी जाती हैं। बता दें, कुसुमावती देवी पोल्ट्री फार्म चलाती हैं और खेत के एक छोटे से हिस्से में घर बनाकर रहती हैं। उनके दो बेटे हैं और इन बेटों के 3 बच्चे भी हैं। एक भरा-पूरा परिवार है, लेकिन अपनी जिद की वजह से कुसुमावती देवी एक अलग घर में रहती हैं।

बालू न खाएं तो खराब हो जाती है तबीयत
गांव के लोगों के मुताबिक, उन्हें ध्यान नहीं है कि यह कब से कुसुमावती बालू खा रही हैं। लेकिन पिछले 40-45 बरस से उन्होंने दिन में तीन टाइम बालू खाते देखा गया है। कुसुमावती देवी का कहना है कि यदि वे रेत न खाएं तो उनकी तबीयत खराब हो जाएगी।












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