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Varanasi: काशी की गलियों में घूमने वाली दो फीमेल डॉग्स जाएंगी विदेश, एक इटली और दूसरी जाएगी नीदरलैंड

Varanasi: काशी की गलियों में घूमने वाली दो फीमेल डॉग्स विदेश जाने वाली हैं। दोनों का पासपोर्ट तैयार हो गया है और जल्द ही उन्हें फ्लाइट से विदेश भेजा जाएगा। जिसमें एक को इटली तो दूसरी को नीदरलैंड भेजा जाना है।

Two female dogs of Varanasi will go to Italy and Netherlands

Varanasi: काशी की गलियों में और गंगा घाट पर टहलने वाली जया और मोती नामक दो फीमेल डॉग्स को विदेश भेजने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि काशी में भ्रमण के लिए आए पर्यटकों को दोनों फीमेल डॉग्स इतनी पसंद आईं कि वे उन्हें अपने घर रखना चाहते हैं।

विदेश भेजने के लिए एक फीमेल डॉग्स का पेपर वर्क लगभग तैयार हो गया है। दूसरे के पेपर वर्क को लेकर काम चल रहा है और जल्द ही उसका भी पेपर तैयार हो जाएगा। पेपर तैयार हो जाने के बाद दोनों फीमेल डॉग्स को फ्लाइट से विदेश भेजा जाएगा।

दरअसल, कुछ समय पहले नीदरलैंड की रहने वाली मीरल और इटली की रहने वाली वीरा लज्जारेती वाराणसी में भ्रमण के लिए आईं थी। वाराणसी में भ्रमण के दौरान ही दुर्घटना वस दोनों फीमेल डॉग्स का अलग-अलग समय और अलग-अलग स्थान पर विदेशियों से मुलाकात हुई।

एनीमोटल केयर ट्रस्ट संस्‍था के संदलीप सेन गुप्ता द्वारा बताया गया कि करीब 6 माह पहले नीदरलैंड की रहने वाली मीरल वाराणसी में भ्रमण के लिए आईं थीं। संदलीप सेन गुप्‍ता के अनुसार काशी के दरभंगा घाट पर जया नामक कुत्ते को कुछ कुत्ते काट रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद मीरल ने स्थानीय लोगों की मदद से उन कुत्तों को वहां से भगाया और जया को उनसे मुक्त कराया।

मुक्त कराने के बाद गंभीर रूप से घायल जया के उपचार के लिए मीरल ने एनीमोटल केयर ट्रस्ट संस्‍था से संपर्क किया। संपर्क करने के बाद संस्था के लोग वहां पहुंचे और जया का उपचार कराने के लिए उसे अस्पताल लेकर गए। अस्पताल भिजवाने के बाद मीरल द्वारा जया के स्वास्थ्य की जानकारी ली जाती रही। वाराणसी से जाते समय मिलने इच्छा जाहिर की कि वह जया को अपने साथ ले जाना चाहती हैं। मीरल के अनुरोध पर संस्था द्वारा जया का पेपर तैयार करवाया जा रहा है।

इसी तरह इटली की रहने वाली वीरा लज्जारेती अपने पति के साथ भी करीब 6 माह पहले वाराणसी आईं थीं। अस्सी घाट पर भ्रमण के दौरान उन्होंने देखा कि एक फीमेल डॉग को मारपीट कर बोरे में भरकर लोगों ने अस्सी घाट के किनारे फेंक दिया था। उसके बाद वीरा ने एनीमोटल केयर ट्रस्ट संस्‍था के लोगों से संपर्क किया।

कुत्ते को संस्था के लोगों ने अस्पताल पहुंचाया जहां उसका उपचार किया गया इस दौरान वीरा भी मौजूद रहीं। उपचार के बाद जब डॉग ठीक हुई तो वीरा ने उसका नाम मोती रख दिया। उसके बाद वीरा द्वारा भी उसे अपने साथ ले जाने की इच्छा जाहिर की गई।

ऐसे में संस्था के लोगों द्वारा वीरा को डॉग विदेश ले जाने की पूरी प्रक्रिया बताई गई। पेपर वर्क में काफी समय लग जाता जिसके चलते वीरा अपने पति के साथ वापस लौट गईं। हालांकि उन्होंने संस्था के लोगों से कहा कि पेपर वर्क आप लोग तैयार करवाइए इसे मैं इटली ले जाऊंगी।

ऐसे में संस्था के लोगों के द्वारा जया के पेपर वर्क तैयार करवा लिए गए हैं जबकि मोती के पेपर तैयार होने में अभी करीब 2 महीने का समय लगेगा। दोनों के पेपर तैयार हो जाने के बाद उन्हें फ्लाइट से विदेश भेजा जाएगा।

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