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मरने के बाद न तो भगवान मिले हैं और न मिलेंगे, सांसों की पूजी खत्म होने से पहले ये काम जरुरी है :- बाबा उमाकांत

जय गुरुदेव के शिष्य बाबा उमाकांत ने वाराणसी में कहा कि यह मनुष्य शरीर किराए का मकान है, मरने के बाद न तो भगवान मिले हैं और न मिलेंगे। सांसों की पूजी खत्म होने से पहले ये काम जरुरी है

जय गुरुदेव के शिष्य बाबा उमाकांत का दो दिनों का सत्संग एवं नामदान कार्यक्रम शनिवार को रिंगरोड किनारे ऐढ़े गांव में शुरू हुआ। कार्यक्रम में आए अनुयायियों को सत्संग की अमृत वर्षा करते हुए नामदान के महत्व को बताया गया। बाबा उमाकांत ने कहा कि यह मनुष्य शरीर किराए का मकान है। सासों की पूंजी खत्म होने पर सबको एक दिन इसे खाली करना पड़ेगा। यह दुर्लभ अनमोल मनुष्य शरीर केवल खाने-पीने, मौज-मस्ती करने के लिए नहीं मिला है, बल्कि जीते जी प्रभु को पाना है। श्मशान घाट पर शरीर को मुक्ति मिलती है आत्मा को नहीं।

शरीर के रहते-रहते मिला जा सकता है भगवान से

शरीर के रहते-रहते मिला जा सकता है भगवान से

उन्होंने कहा कि जीवन का जो समय शेष बचा है उससे अपनी आत्मा को जगा लो। शरीर के रहते रहते भगवान से मिला जा सकता है, मरने के बाद किसी को भी भगवान न तो मिला और न मिलेगा। आत्मा की मुक्ति परमात्मा के पास पहुँच जाने पर मिलती है, जो केवल समर्थ गुरु ही दिला सकते हैं। करोड़ों जन्मों के पुण्य जब इकट्ठा होते हैं तब सन्त दर्शन, सतसंग और नामदान का लाभ मिलता है। सन्त और सतगुरु किसी दाढ़ी, बाल या वेशभूषा का नाम नहीं होता, शिव नेत्र सबके पास है।

नाम की कमाई से बुझेगी काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की ज्वाला

नाम की कमाई से बुझेगी काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की ज्वाला

उन्‍होंने कहा कि संतों की दया से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत के दर्शन, सतसंग व नामदान लेकर उनके बताए रास्ते पर चलने से लोक और परलोक संवर जाता है। कलयुग में सीधा सरल प्रभु प्राप्ति का रास्ता पांच नाम के नामदान का है जो आदि से चला आ रहा और अंत तक रहेगा। संतमत की साधना सभी लोगों के लिए सरल है। नाम की कमाई करो, इसी से काम क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की ज्वाला बुझेगी।

मेहनत और ईमानदारी की कमाई से होती है बरकत

मेहनत और ईमानदारी की कमाई से होती है बरकत

बाबा उमाकांत ने निरोगी जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि संयम नियम से रहने पर जल्दी बीमारी नहीं लगेंगी। माता-पिता, बूढ़े-बुजुर्गों, अधिकारी, कर्मचारियों का सम्मान करो। नियम-कानून का पालन करो, देश भक्त बनो और बनाओ। मेहनत व ईमानदारी की कमाई में बरकत होती है। प्रतिदिन थोड़ी देर अपने-अपने तौर-तरीके से ही सही पूजा- भजन और इबादत जरूर करो। पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ और जल बचाओ। यह सब करने के चलते ही प्रकृति के सभी जीवों को बचा सकते हो।

कई देशों और राज्यों से आए हैं अनुयायी

कई देशों और राज्यों से आए हैं अनुयायी

वाराणसी जिले के ऐढे गांव में हो रहे सत्संग में वाराणसी ही नहीं यूएई, यूएसए, मॉरीशस के साथ ही दुनियां के 8 देशों व भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, हिमांलय प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक समेत कई प्रान्तों से लाखों की संख्या में अनुयायी आए हुए हैं। सत्संग में आए हुए अनुयायियों की सुविधा के लिए ऐढे गांव में 600 से अधिक शौचालय और 12 भंडारा निरंतर संगत द्वारा चलाए जा रहे हैं।

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