ज्ञानवापी प्रकरण में हिंदू पक्ष ने कहा आजादी के दिन से लेकर 1993 तक नियमित होती थी मां शृंगार गौरी की पूजा
वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद-मां श्रृंगार गौरी केस की आज हुई सुनवाई में हिंदू पक्ष ने कहा आजादी के दिन से लेकर 1993 तक नियमित होती थी मां शृंगार गौरी की पूजा
वाराणसी, 18 जुलाई : ज्ञानवापी मस्जिद और मां श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई आज जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में की गई। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की राखी सिंह के अधिवक्ता शिवम गौड़ ने कहा कि देश की आजादी के दिन से लेकर 1993 तक मां श्रृंगार गौरी की प्रतिदिन पूजा होती थी। इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के 100 जजमेंट के साथ ही अदालत में 367 पन्ने भी पेश किए। सोमवार को हुई सुनवाई के अंत में अधिवक्ता शिवम गौड़ को बहस जारी रखने की अनुमति देते हुए न्यायालय ने सुनवाई की अगली तिथि 19 जुलाई नियत की है। अब इस केस में मंगलवार को सुनवाई होगी।

मुस्लिम पक्ष द्वारा दी जा चुकी हैं ये दलीलें
पूर्व में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष द्वारा अपनी दलीलें रखी जा चुकी हैं। मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलों में कहा कि ज्ञानवापी परिसर पर लगभग 600 वर्ष से ज्यादा समय से मस्जिद बनी हुई है, जहां मुस्लिमों द्वारा पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है। मुस्लिम पक्ष द्वारा प्लेसेज आफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा जा चुका है कि 15 अगस्त 1947 में जो धार्मिक स्थल जिस हालात में थे उसी हालात में बने रहेंगे। यह भी कहा गया कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है।
अगस्त 2021 में हुआ था मुकदमा
18 अगस्त 2021 को राखी सिंह सहित 5 महिलाओं ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में मां शृंगार गौरी मंदिर में नियमित पूजा-पाठ और ज्ञानवापी मस्जिद में स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा का केस दाखिल किया था। कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के सर्वे का आदेश दिया था। मई माह में यहां सर्वे किया गया और कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना और टॉयलेट को सील करा दिया था। सर्वे के बाद हिन्दू पक्ष द्वारा दावा किया जा रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में आदि विश्वेश्वर का शिवलिंग सहित कई हिंदू चिन्ह मिले हैं।












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