जानिए रिक्शा चालक के बेटे गोविंद जायसवाल के बारें में, दोस्त के घर हुआ अपमान तो IAS बन दिया जवाब
IAS Govind Jaiswal Success Story: गोविंद जायसवाल एक बार अपने दोस्त के घर गए थे, जहां पर उनके दोस्त के पिता ने घर वालों के बारे में पूछा। जिसपर गोविंद ने बताया कि उनके पिता रिक्शा चलाते हैं, जिसके बाद दोस्त के पिता ने गोविंद का अपमान किया।
इतना ही नहीं, लोगों द्वारा उन्हें रिक्शा चलाने की सलाह भी दी गई। जिसके बाद गोविंद जायसवाल को अपनी जिंदगी बदने की धुन सी सवार हो गई और बचपन में ही उन्होंने IAS अधिकारी बनने का तय कर लिया था। आइए जानते हैं IAS गोविंद जायसवाल की सफलता की कहानी...

आईएएस गोविंद जायसवाल, भगवान शिव की नगरी काशी (Varanasi) के रहने वाले हैं और इस वक्त स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर तैनात है। गोविंद जायसवाल के पिता पिता नारायण रिक्शा चलाते थे और उनकी मां गृहिणी थीं। जब गोविंद जायसवाल 7वीं की पढ़ाई कर रहे थे उस वक्त उनकी मां का निधन हो गया था। ब्रेन हैमरेज की वजह से गोविंद की मां का निधन हुआ था।
गोविंद जायसवाल के अलावा उनकी तीन बहने थी, जो अपने पिता और भाई के साथ काशी के अलईपुरा में 10 बाई 12 की एक कोठरी में रहती थी। हालांकि, गोविंद जायसवाल के पिता नारायण की माली हालत पहले काफी अच्छी हुआ करती थी। लेकिन, मां के इलाज में काफी ज्यादा खर्च हो गया था। इससे परिवार बेहद गरीबी में जीवन यापन करने लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोविंद के पिता एक रिक्शा कंपनी के मालिक थे और उनके पास 35 रिक्शा थे।
इस बीच गोविंद की मां ब्रेन हैमरेज का शिकार हो गई। पत्नी के इलाज में गोविंद के पिता के ज्यादातर रिक्शा बिक गए और वह गरीब हो गए। कई बार गोविंद और उनके परिजन सिर्फ सूखी रोटी खाकर अपना गुजर बसरा किया। इसके बावजूद गोविंद के पिता ने कभी हार नहीं मानी और अपने चारों बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं रखी। गोविंद की तीनों बहन ग्रेजुएट है। हालांकि, गोविंद के पिता ने अपनी तीनों बेटियों की शादी के लिए अपने बचे हुए रिक्शे भी बेच दिए थे।
गोविंद जायसवाल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई उस्मानपुरा के सरकारी स्कूल से की थी। उसके बाद उन्होंने वाराणसी में ही स्थित हरिश्चंद्र यूनिवर्सिटी से मैथ में ग्रेजुएशन किया था। एक इंटरव्यू के दौरान गोविंद जायसवाल ने बताया कि उनके पिता को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट या ग्रेजुएशन के बारे में नहीं पता था। इसलिए उन्होंने अपने पिता से 15वीं तक पढ़ने को कहा था। उन्होंने बताया था कि बचपन से ही उन्होंने जिंदगी में काफी संघर्ष देखे हैं। हालांकि, इस मुश्किल सफर में उनके पिता और बहनों का उन्हें भरपूर साथ मिला।
अगर आज वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं तो उसमें परिवार का बड़ा रोल है। लोग उनके परिवार की गरीबी देखकर कहते थे कि परिवार की मदद के लिए गोविंद को भी ऑटो चलाना चाहिए। बहनों में को दूसरों के घरों में बर्तन साफ करने की सलाह दी जाती थी। हालांकि, इन सभी बातों को गोविंद चुपचाप सुन लेते थे। कभी जवाब नहीं देते थे। उन्हें पता था कि क्या करना है। 10वीं तक पहुंचते-पहुंचते और ज्यादा अपने लक्ष्य की तरफ फोकस्ड हो गए थे।
पढ़ाई के लिए पिता ने बेच दिया था जमीन का एक टुकड़ा
UPSC परीक्षा की तैयारी करने के लिए साल 2006 में गोविंद दिल्ली आ गए थे। गोविंद की पढ़ाई के लिए उनके पिता ने जमीन का एक टुकड़ा भी बेच दिया था। इतना ही नहीं, पैर में सेप्टिक होने के बावजूद उनके पिता रिक्शा चलाकर गोविंद को पॉकेट मनी भेजते थे। तो वहीं, अपने परिवार की मुश्किल हालातों का एहासास गोविंद को भी था। उन्हें पता था कि परीक्षा पास करने के लिए वह ज्यादा समय नहीं ले सकते हैं। दिल्ली आकर भी उन्होंने कोचिंग जॉइन नहीं की। बल्कि, वह खुद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे।
दोस्त के घर हुआ था अपमान
अपने एक इंटरव्यू में गोविंद जायसवाल ने बताया था कि एक दिन वह अपने दोस्त के घर खेलने गए थे। तो दोस्त के पिता ने उनके घर वालों के बारे में पूछा। गोविंद ने बताया कि उनके पिता रिक्शा चलाते हैं। इस बात से दोस्त के पिता बौखला गए और खूब अनाप-शनाप सुनाया। अगले दिन उन्होंने अपने टीचर से पूछा कि वह अपनी जिंदगी को कैसे बदल सकते हैं। टीचर ने इसके दो रास्ते बताए। पहला कोई बड़ा कारोबारी बन जाने का। दूसरा आईएएस बनने का। यहीं से उन्होंने आईएएस बनने की ठानी थी।
पहले प्रयास में बने IAS
बता दें कि गोविंद ने रुपये बचाने के लिए एक टाइम का टिफिन और चाय तक बंद कर दी थी। 2007 में गोविंद ने यूपीएससी परीक्षा के अपने पहले ही प्रयास में 48वीं रैंक हासिल की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएएस गोविंद की लाइफ स्टोरी पर एक बॉलीवुड फिल्म बनी है। जिसका नाम है'दिल्ली अब दूर नहीं'। तो वहीं, गोविंद की सफलता की कहानी लाखों लाख लोगों को प्रेरणा देती है।












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