भारत 2025 तक TB खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, Global Target 2030 है: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने वाराणसी में वन वर्ल्ड टीबी समिट कार्यक्रम में कहा कि भारत 2025 तक टीबी को खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है, जबकि वैश्विक लक्ष्य 2030 है।

वाराणसी के सिगरा में स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वन वर्ल्ड टीबी समिट कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत अब वर्ष 2025 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसका Global Target 2030 है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी टीबी का मरीज इलाज से न छूटने पाए इसके लिए सरकार द्वारा कई रणनीति पर काम की गई है। कुछ समय पहले ही भारत ने One Earth, One Health के मिशन को आगे बढ़ाने की पहल की है अब One World TB Summit के जरिए भारत ग्लोबल गुड के एक और संकल्प को पूरा कर रहा है।
हमने नई रणनीति पर शुरू किया है काम
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी इलाज से छूटे नहीं, इसके लिए नई रणनीति पर काम शुरू किया है। उन मरीजों को आयुष्मान कार्ड से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि वन वर्ड टीबी समिट के जरिये भारत एक नए संकल्प पूरा कर रहा है। भारत में टीबी को स्थानीय भाषा में क्षय कहा जाता है। उन्होंने कहा कि विदेश से आए अतिथियों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में टीबी मरीजों को लोग गोद ले रहे हैं। इसे भारत में निक्षय मित्र कहा जाता है। उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों के पोषण के लिए वर्ष 2018 से डीबीटी के लिए 2000 करोड़ उनके बैंक खाते में भेजे गए। इससे करीब 75 लाख मरीजों को लाभ पहुंचा है। कोई भी इलाज से छूटे नहीं इसके लिए हमने नई रणनीति पर काम शुरू किया है। उन मरीजों को आयुष्मान कार्ड से जोड़ा है। लैब की संख्या बढ़ाई है। इस कड़ी में आज हम टीबी मुक्त पंचायत की घोषणा कर रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत अब तीन महीने ही मरीजों को दवा लेनी होगी। इससे मरीजों को सुविधा मिलेगी। मरीजों को ट्रैक करने के लिए आईसीएमआर के साथ मिलकर निक्षय पोर्टल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि भारत 2025 तक टीबी मुक्त करने का संकल्प लिया है। जबकि विश्व में इसका लक्ष्य 2030 तक है। आज टीबी के लिए 80 प्रतिशत दवाएं भारत में बनती हैं।
प्रधानमंत्री ने काशी की महत्ता का बखान करते हुए कहा कि काशी नगरी वे शाश्वत धारा है, जो हजारों वर्षों से मानवता के प्रयासों और परिश्रम की साक्षी रही है। काशी इस बात की गवाही देती है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो जब सबका प्रयास होता है तो नया रास्ता भी निकलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ हमारे वैश्विक संकल्प को काशी एक नई ऊर्जा देगी। उन्होंने महात्मा गांधी के एक वाक्ये को सुनाया जिसमें कुष्ठ रोग उन्मूलन की पहल थी तथा बताया कि किस प्रकार उन्होंने गुजरात का मुख्यमंत्री रहते वहां कुष्ठ रोग का उन्मूलन किया। टीबी मरीज़ों को जागरूक करने पर भी हमें ध्यान देना होगा।
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प्रदेश में 2 लाख 25 हजार टीबी रोगियों को लिया गया गोद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर्म स्थली काशी है। आज उनके नेतृत्व में भारत नित नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को 2025 तक टीबी से मुक्त करने का जो संकल्प दिया था, आज हम उसके नजदीक पहुंच चुके हैं। आज स्टॉप टीबी कैंपेन का जो थीम दिया गया है, ये वास्तव में उनके संकल्पों को मजबूती प्रदान करने और उसे आगे बढ़ाने का है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश 21 फीसदी टीबी के मरीज पाए जाते रहें हैं। पिछले 5 साल में उत्तर प्रदेश ने जो लक्ष्य प्राप्त किए हैं, उनमें 16 लाख 90 हजार रोगियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में पोषण सहायता के माध्यम से अबतक 422 करोड़ का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक उत्तर प्रदेश में 2 लाख 25 हजार टीबी रोगियों को गोद लिया गया है।
टीबी हारेगा और भारत जीतेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार देश में ऐसा हुआ है कि जब किसी महामारी के आने पर स्वदेशी वैक्सीन बनाया गया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की 40 करोड़ जनता को मुफ्त में वैक्सीन लगाया गया है। उत्तर प्रदेश टीबी बीमारी की रोकथाम के लिए विभिन्न केंद्रों पर डॉट्स का वितरण किया जा रहा है। इंफ्लाटिस और एक्यूट इंफ्लाटिस के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में संचारी रोग के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जो माडल बनेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2025 तक टीबी का पूरी तरह उन्मूलन भारत से होगा। टीवी हारेगा और भारत जीतेगा।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ब्राजील, नाइजीरिया देशों के स्वास्थ्य मंत्री तथा प्रतिनिधि तथा डब्ल्यूएचओ के रीजनल डायरेक्टर भी शामिल थे। सम्मेलन में वर्चुअल माध्यम से विभिन्न राज्यों के राज्यपाल भी जुड़े थे तथा भारी संख्या में देश-विदेश से टीबी के क्षेत्र में काम करने वाले डॉक्टरों की उपस्थिति भी रही।












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