डीजे और डांडिया के लिए लेनी होगी इजाजत, नहीं तो हो सकती है 6 महीने की सजा, जानिए क्या है नया निर्देश

नवरात्रि के दौरान वाराणसी में कई जगह लोगों द्वारा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसमें कई जगह डांडिया नृत्य का भी आयोजन किया जाता है तथा डीजे भी बजाए जाते हैं। इसी तरह होटल, प्रेक्षाग्रह, उत्सव और मैरिज लॉन में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।

ऐसे में अब इन आयोजनों के लिए आयोजन कर्ताओं को मनोरंजन विभाग से अनुमति लेनी होगी। अनुमति न लेने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्यवाही करते हुए उनसे जुर्माना वसूला जाएगा इसके अलावा उन्हें 6 महीने की सजा या जुर्माना तथा सजा दोनों हो सकती है।

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इस बारे में प्र० सहायक आयुक्त राज्य कर (प्रभारी पूर्व मनोरंजन कर) ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन या तो सम्बन्धित होटल/प्रेक्षागृह/मैरेज लान के स्वामियों द्वारा की जा रही है अथवा विभिन्न पार्टियों द्वारा इस अवसर पर बुकिंग करके सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश शासन के द्वारा उत्तर प्रदेश चलचित्र (विनियमन) (संशोधन) अधिनियम की धारा 2 क के अनुसार मनोरंजन को "मनोरंजन" में कोई प्रदर्शन प्रस्तुतीकरण, आमोद, खेल, कृणा (धुडदौड सहित), डायरेक्ट टू होम प्रसारण सेवायें, केबिल सेवायें, चलचित्र, डिजिटल प्रोजेक्शन सिस्टम और वीडियो के माध्यम से प्रदर्शन जिसमें व्यक्तियों का प्रवेश भुगतान के माध्यम से किया जाता है, सम्मिलित है।

इसी तरह चलचित्र तथा डिजिटल प्रदर्शन के पूर्व या उसके दौरान या पृथक प्रोजेक्शन सिस्टम के माध्यम से प्रदर्शन के मामले में वृत्तचित्त रूप से समाचार फिल्म वृत्तचित्त, कार्टून, विज्ञापन, लघुफिल्म तथा स्लाईड सम्मिलित है। इसमें राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर मनोरंजन के रूप में अधिसूचित कोई क्रिया कलाप भी सम्मिलित है के रूप में परिभाषित किया गया है।

उक्त संशोधित अधिनियम की धारा-4 क के अनुसार कोई मनोरंजन जिसपर कर उद्ग्रहणीय हो, चाहे वह कर भुगतान के दायित्व से मुक्त हो या न हो, जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना आयोजित नही किया जायेगा। यदि कोई व्यक्ति बिना जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के उपरिवर्णित आमोदो में से किसी भी आमोद का आयोजन करता है तो सक्षम न्यायालय में वाद संस्थित किया जा सकता है, जिसके लिए संशोधित अधिनियम की धारा- 8 (क) उपधारा (1) के अर्न्तगत रू० 20,000.00 (बीस हजार मात्र ) की शास्ति अथवा छः माह की सजा अथवा दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

इसके अलावा अपराध शमन की प्रार्थना पत्र दिये जाने पर जिला मजिस्ट्रेट के द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 8 (1) के अन्तर्गत रू0 20,000.00 (बीस हजार मात्र ) की शास्ति अधिरोपित की जा सकती है। उन्होंने बताया कि स्वामीगण समस्त होटल/प्रेक्षागृह/उत्सव व मैरेज लान को निर्देशित किया गया है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों जैसे डांडिया एवं डीजे कार्यक्रम एवं अन्य मनोरंजन कार्यक्रम के आयोजनकर्ता द्वारा जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करके ही कार्यक्रम का आयोजन करें एवं देय जी०एस०टी० का भुगतान भी सुसंगत नियमों के तहत करें।

अनुमति न लेने वालों के खिलाफ भौतिक निरीक्षण में इस तथ्य का संज्ञान होने पर कार्यक्रम को रोकने के साथ-साथ संशोधित अधिनियम की धारा-4क के अर्न्तगत कर निर्धारण एवं रू० 20,000 का अर्थदण्ड भी अधिरोपित किया जायेगा और जिसका पूर्ण उत्तदरायित्व आयोजनकर्ता एवं आयोजन स्थल स्वामी का होगा। अधिक जानकारी के लिए प्रo सहायक आयुक्त राज्य कर (प्रभारी पूर्व मनोरंजन कर) के (मो0नं0-7235003376) से अथवा राज्य कर कार्यालय, चेतगंज में किसी भी कार्य दिवस में सम्पर्क कर प्राप्त किया जा सकता है।

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