वाराणसी: 'हाइड्रोजन मैन' पद्मश्री ओंकारनाथ श्रीवास्तव का कोरोना से निधन
वाराणसी, अप्रैल 25: हाइड्रोजन ऊर्जा और नैनोसाइंस के लिए पूरी दुनिया में विख्यात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर पद्मश्री ओंकारनाथ श्रीवास्तव का कोरोना से निधन हो गया। बता दें, दो सप्ताह पहले ही उनके रिसर्च स्कॉलर अभय जयसवाल की कोरोना से मौत हुई थी। इसके बाद उनकी कोरोना जांच कराई गई थी। 20 अप्रैल को ओंकारनाथ श्रीवास्तव की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उन्हें बीएचयू में भर्ती कराया गया था। तबीयत बिगड़ने पर शनिवार को उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। रविवार को राजकीय सम्मान के साथ वाराणसी के राजा हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

ISRO को सबसे ताकतवर सुपर फ्यूल स्टोरेज भेजने वाले थे प्रोफेसर श्रीवास्तव
प्रोफेसर ओंकारनाथ श्रीवास्तव को पद्मश्री समेत विज्ञान के सर्वोच्च पुरस्कार शांति स्वरूप भटनागर, होमी जहांगीर भाभा सम्मान, प्रौद्योगिकी विभाग का नेशनल रिसर्च अवॉर्ड समेत कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके थे। प्रोफेसर श्रीवास्तव ISRO को सबसे ताकतवर सुपर फ्यूल स्टोरेज भेजने की तैयारी में थे। प्रोफेसर श्रीवास्तव ने इस सुपर फ्यूल स्टोरेज का अनुसंधान किया था। इसे सबसे ताकतवर सुपर फ्यूल स्टोरेज बताया जा रहा है। इस सुपर फ्यूल स्टोरेज में इंधन का भंडारण कार्बन एरोजेल की शक्ल में होता है, जोकि रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड हाइड्रोजन को सोख कर स्टोर करता है। इस टेक्नॉलॉजी से अंतरिक्ष मिशन में लंबी दूरी के रॉकेट की रफ्तार और ताकत में कई गुना इजाफे का दावा किया गया था।
बता दें, प्रोफेसर श्रीवास्तव ने नैनोटेक्नोलॉजी से मल्टीपरपज फिल्टर का निर्माण भी किया था। उनकी लीडरशिप में हाइड्रोजन अनुसंधान के लिए नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन और बीएचयू के हाइड्रोजन एनर्जी सेंटर के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत जल्द बनारस में हरित ऊर्जा हाइड्रोजन से 50 ऑटो रिक्शा चलने थे।












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