विरोध के बाद संकटमोचन मंदिर से बाहर निकाले गए केजरीवाल, नए ठिकाने की तलाश

arvind kejriwal
वाराणसी। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भले ही भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी को वाराणसी में टक्कर देने की बात कर रहे हो, लेकिन भगवान भोलनाथ की ये काशी नगरी केजरीवाल के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। यहां उन्हें बार-बार लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

कभी उनपर स्याही से हमला होता है तो कभी हाय-हाय के नारे लगते है। अब तो हद ही हो गई। लोगों के विरोध के कारण उन्हें अपना ठिकाना तक बदलना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल को विरोध के चलते अपना ठिकाना बदलना पड़ा है। अभी तक वह संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वंभर मिश्र के घर पर रुके हुए थे, लेकिन महंत पर भारी दवाब होने के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।

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केजरीवाल संकटमोचन मंदिर में मिश्र पर रुके थे। केजरीवाल के साथ उनके माता-पिता गीता और गोविंद केजरीवाल को भी संकट मोचन मंदिर परिसर में ही रह रहे थे, लेकिन विरोध के बाद अब उन्हें ठिकाना बदलना पड़ा है। अरविंद के खिलाफ 15 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। संकट मोचन मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं ने मंदिर में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने की शिकायत की थी। इसी आधार पर महंत पर अरविंद को घर से हटाने का दबाव बना है र उन्हें घर खाली करने को कहा गया।

वहीं आप' सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल और उनके माता-पिता अब बीएचयू के इलाके दुर्गा खंड में शिफ्ट हो गए हैं। वहीं शुक्रवार को केजरीवाल पर प्रचार के दौरान टमाटर फेंके गए। विरोध झेलने वालों में सिर्फ केजरीवाल ही नहीं हैं, बल्कि 'आप' के अन्य प्रत्याशी भी हैं। अमेठी से राहुल गांधी के खिलाप चुनाव लड़ रहे कुमार विश्वास को भी लगातार धमकी मिल रही है।

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