Masan Ki Holi: क्या चिता भस्म की होली शास्त्र सम्मत है? काशी के विद्वानों ने उठाए सवाल, जानिए कब होगा आयोजन
Masan Ki Holi: उत्तर प्रदेश के वृंदावन और काशी में मनाई जाने वाली होली विश्व प्रसिद्ध है। काशी में हर साल रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ की होली के बाद महाश्मशान में चिता भस्म की होली खेली जाती है। इस बार भी इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन संत समाज ने इसका विरोध किया है।
काशी के मणिकर्णिका घाट पर जलती चिताओं के बीच खेली जाने वाली होली को लेकर संतों और शास्त्रविदों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शास्त्रों में कहीं भी इसका उल्लेख नहीं है। वहीं, आयोजनकर्ताओं का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसमें बाबा विश्वनाथ के भक्त भस्म से होली खेलते हैं।

काशी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर रंगभरी एकादशी से होली का उत्सव शुरू हो जाता है। मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराकर अपने धाम लौटते हैं, जहां काशीवासी उनके साथ गुलाल से होली खेलते हैं।
इसके अगले दिन भगवान शिव अपने गणों-भूत, पिशाच और अघोरियों के साथ महाश्मशान में चिता भस्म से होली खेलते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भक्त बाबा मशाननाथ के मंदिर में गुलाल और भस्म अर्पित कर इस अनोखी होली का आयोजन करते हैं।
डिजिटल प्रचार से बढ़ी लोकप्रियता
पहले यह आयोजन स्थानीय स्तर तक ही सीमित था, लेकिन सोशल मीडिया के प्रचार-प्रसार के कारण अब देश-विदेश से लोग इसे देखने और इसमें भाग लेने के लिए काशी पहुंचने लगे हैं। आयोजनकर्ताओं का कहना है कि यह एक आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, इसके बढ़ते दायरे और भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसमें कुछ नियम लागू करने की योजना बनाई है। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए नशा कर हुड़दंग मचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
संत समाज का विरोध, बताया अपशकुन
काशी विद्वत परिषद, सनातन रक्षक दल और कई अन्य धार्मिक संगठनों ने इस आयोजन को शास्त्र सम्मत न बताते हुए विरोध किया है। विद्वत परिषद के महामंत्री रामनारायण द्विवेदी का कहना है कि शास्त्रों में कहीं भी चिता भस्म से होली खेलने का उल्लेख नहीं मिलता।
उनका तर्क है कि अघोरी और नागा साधु तो बाबा मशाननाथ के मंदिर में भस्म चढ़ाते हैं, लेकिन यह आयोजन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए बड़ा कर दिया है। अब यहां डीजे और भीड़ जुटाई जा रही है, जो महाश्मशान जैसे पवित्र स्थल की मर्यादा के खिलाफ है।
शांति बनाए रखने के निर्देश
इस आयोजन को लेकर विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने इसमें संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। काशी के संतों ने भी कहा है कि यदि यह आयोजन शास्त्र सम्मत नहीं है, तो इसे रोका जाना चाहिए।
हालांकि, आयोजनकर्ताओं का कहना है कि वे परंपरा को जारी रखेंगे, लेकिन इसमें किसी तरह की अव्यवस्था नहीं होने देंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि आयोजन मर्यादित रूप से संपन्न हो।
कब और कहां होगा चिता भस्म की होली का आयोजन
काशी में इस बार चिता भस्म की होली 10 मार्च से शुरू होगी।
- 10 मार्च: हरिश्चंद्र घाट पर रंगभरी एकादशी के अवसर पर चिता भस्म की होली खेली जाएगी।
- 11 मार्च: महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म की होली का मुख्य आयोजन होगा।
- 13 मार्च: होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा।
- 14 मार्च: रंगों के त्योहार होली का भव्य आयोजन होगा।













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