Gyanvapi Case: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की मांग पर सुनवाई पूरी, 21 को कोर्ट से आ सकता है आदेश
Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मस्जिद और मां श्रृंगार गौरी के मूल मामले में एएसआई द्वारा रडार तकनीक से सर्वे कराने की अर्जी पर वाराणसी जिला अदालत में शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई।
Varanasi Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मस्जिद और मां सिंगार गौरी मामले में एएसआई द्वारा रडार पद्धति से सर्वे कराने के आवेदन पर शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई। इस मामले में न्यायालय द्वारा पत्रावली सुरक्षित रख ली गई है और 21 जुलाई को आदेश आने की संभावना जताई जा रही है।
जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में हिंदू पक्ष की चार महिला वादनी जिसमें मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी, सीता साहू और रेखा पाठक की तरफ से 16 मई को आवेदन देकर कहा गया था कि सील किए गए वजू एरिया को छोड़कर बचे हुए एरिया का एएसआई के राडार तकनीकी से सर्वे कराया जाए।

इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा 19 मई को आपत्ति की गई थी। आपत्ति के बाद हिंदू पक्ष द्वारा 22 मई को न्यायालय में अपनी दलील रखी गई थी। उसके बाद 7 जुलाई को सुनवाई की तिथि नियत की गई थी लेकिन जिला जज के अवकाश पर होने के कारण अगली तारीख 12 जुलाई नियत की गई थी।
12 जुलाई को हिंदू पत्नी से आवेदन के निस्तारण पर बल दिया उसके बाद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा आपत्ती के लिए समय मांगी गई। मसाजिद कमेटी द्वारा समय मांगे जाने के बाद 14 जुलाई की तिथि नियत की गई थी।
इसी मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव भी कोर्ट में उपस्थित हुए। इस दौरान कोर्ट में हिंदू पक्ष की दलील रख रहे वकील विष्णु शंकर जैन द्वारा बताया गया कि ज्ञानवापी मस्जिद के वजू स्थल को छोड़कर खाली स्थान का सर्वे कराया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे से धक-धक की आवाज आ रही है ऐसे में उसके नीचे एक और शिवलिंग मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी दीवार और पूरे परिसर का सर्वे कराने से एक इतिहास बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिना आवेदन के भी सर्वे का आदेश कोर्ट द्वारा दिया जा सकता है।
बताया कि इस मामले में स्वयंभू आदि विश्वेश्वर मंदिर को लेकर मंदिर का इतिहास बताने वाला कोई जिंदा नहीं है। लेकिन सर्वे कराए जाने के बाद इसकी हकीकत सामने आ सकती है और इतिहास है जो बहुत कुछ कह रहा है ऐसे में सर्वे कराया जाना उचित होगा।
हिंदू पक्ष के वकील द्वारा यह भी कहा गया कि साक्ष्य एकत्र करने के लिए और मौका को समझने के लिए कोर्ट ऐसा कर सकती है। बताया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बाधित नहीं करता है।
वहीं इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी द्वारा यह दलील दी गई कि 19 मई से स्टे है और उसी आर्डर के क्रम में यह एएसआई सर्वे का आवेदन किया गया है। कहा गया कि इस मामले को सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं है। मुस्लिम पक्ष द्वारा यह भी कहा गया कि इस मामले में एक बार सर्वे हो चुका है उस पर आपत्ति भी की गई है और उसके निस्तारण के बिना दूसरा सर्वे का आदेश नहीं किया जा सकता है।
फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत द्वारा फैसले को सुरक्षित रख लिया गया। बताया जा रहा है कि इस मामले में आगामी 21 जुलाई को कोर्ट द्वारा फैसला सुनाया जा सकता है।












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