BHU News: केंद्रीय निरीक्षण के बाद वाराणसी को मिलेंगे 10 विजन सेंटर, फ्री चश्मा और जांच भी होगी उपलब्ध
BHU eye department: वाराणसी में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तीन सदस्यीय टीम ने बीएचयू और जिले के अन्य प्रमुख अस्पतालों का निरीक्षण कर इससे संबंधित रणनीति तय की है।
निरीक्षण का उद्देश्य अंधता और दृष्टिदोष से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानना था। बीएचयू नेत्र विभाग को इस दिशा में प्रमुख केंद्र के रूप में उभारा जा रहा है। यहां आने वाले समय में नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण की दर में तेजी लाने की योजना है।

बीएचयू के डॉ. आर.पी. मौर्या के नेतृत्व में बीते तीन वर्षों में 64 कॉर्निया प्राप्त कर 52 मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाई गई है। यह आंकड़ा जिले में नेत्र चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और सफलता को दर्शाता है।
केंद्रीय टीम के दिशा-निर्देशों के अनुसार वाराणसी में 10 नए विजन सेंटर खोले जाएंगे। इनका संचालन बीएचयू नेत्र विभाग के सहयोग से किया जाएगा। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
इन केंद्रों पर नेत्र परीक्षण, कॉर्निया संबंधित सेवाएं और दृष्टि दोष की जांच की जाएगी। साथ ही, यहां आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती होगी। नेत्र रोगों की पहचान और तत्काल इलाज की सुविधा मिलने से समय रहते रोग को रोका जा सकेगा।
मुफ्त सर्जरी और चश्मा वितरण की योजना
मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को मुफ्त सर्जरी की सुविधा देने के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत सभी संदिग्ध मरीजों को चिन्हित कर जिला और ब्लॉक स्तर पर ऑपरेशन की व्यवस्था की जाएगी।
बुजुर्गों और जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरित करने की भी घोषणा की गई है। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को इन सेवाओं की जानकारी दी जाएगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी। दृष्टिदोष से ग्रसित पाए गए बच्चों को निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी पढ़ाई में बाधा न आए।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला चिकित्सालयों को निर्देश दिए हैं कि वे शैक्षणिक संस्थानों से समन्वय बनाकर मोबाइल टीमों के माध्यम से इस योजना को लागू करें। इससे बच्चों में प्रारंभिक अवस्था में ही नेत्र रोगों की पहचान हो सकेगी।
मेडिकल स्टाफ से संवाद कर लिया गया फीडबैक
केंद्रीय टीम ने बीएचयू आईएमएस, मंडलीय चिकित्सालय, मिसिरपुर सीएचसी और माधोपुर आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित कई संस्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान ऑपरेशन थिएटर, ओपीडी, दवा वितरण प्रणाली और रेफरल सिस्टम की भी जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल कर्मी और आशा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर योजनाओं की प्रभावशीलता पर फीडबैक लिया गया। सभी संस्थानों को सेवाओं में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय टीम अब निरीक्षण के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी जिसे राज्य और केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों और संभावनाओं का खाका प्रस्तुत करेगी।












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