Varanasi: गंगा बन गईं यमुना, श्री कृष्ण ने कदंब की डाल से पानी में लगाई छलांग, देखने के लिए उमड़ी भारी भीड़
Varanasi News: काशी मेल लक्खा मेले में शामिल प्रसिद्ध नाग नथैया का आयोजन शुक्रवार को किया गया। नाग नथैया को देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस लीला को देखने के लिए काशी नरेश परिवार के कुँवर अनंत नारायण सिंह भी आये थे।
श्री संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने बताया कि वाराणसी में नाग नथैया की लीला करीब 500 साल पहले गोस्वामी तुलसी दास ने शुरू की थी। तब से यह आयोजन हर वर्ष कार्तिक माह में किया जाता है।

गेंद निकालने के लिए कूदे श्री कृष्ण
लीला में दिखाया जाता है कि यमुना नदी में कालिया नाग के आतंक से लोग काफी भयभीत थे। गोकुल के लोग किसी तरह कालिया नाग से मुक्ति चाहते थे। एक दिन श्री कृष्णा अपने बाल शाखों के साथ खेल रहे थे। इसी दौरान गेंद यमुना नदी में चली गई।
नदी में गेंद जाने के बाद कालिया नाग से भयभीत हुए बगैर श्री कृष्ण गेंद निकालने के लिए यमुना नदी में छलांग लगाते हैं। चलांग लगाने के बाद उनके साथ के लोगों को डर लगता है की कहीं कालिया नाग श्री कृष्ण को हानि न पहुंचा दे। लेकिन थोड़ी देर बाद ही श्री कृष्ण कालिया नाग के फन पर सवार होकर बांसुरी बजाते नजर आते हैं।
बांके बिहारी लाल और महादेव के नारे से गूंज उठा घाट
इस लीला को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ एकत्र हुई थी। शाम 4:40 बजे जैसे ही श्री कृष्ण गंगा नदी में छलांग लगाते हैं लोग बांके बिहारी लाल और हर हर महादेव के नारे लगाना शुरू करते हैं। लोगों द्वारा की गई नारेबाजी से पूरा घाट गूंज उठता है।
श्री संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्रा द्वारा बताया गया कि अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा इस लीला का आयोजन इसीलिए किया गया था जिससे सभी धर्म और जातियों को एक धागे में पिरोया जा सके। आज भी पहले की तरह लीला को आयोजित किया जाता है।












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