तो चार से पांच घंटे नहीं सिर्फ 9 मिनट की होगी यमुनोत्री धाम की यात्रा, रोपवे प्रोजेक्ट पर जल्द शुरू होगा काम
यमुनोत्री में प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने से रोपवे की राह खुल गई है।खरसाली से यमुनोत्री मंदिर के लिए रोपवे की कुल लंबाई 3.5 किमी होगी।

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव उत्तरकाशी का यमुनोत्री धाम है। जो कि मां यमुना का उद्गम स्थल है। यमुनोत्री धाम पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल मार्ग से यात्रा करने में चार से पांच घंटे का समय लगता है। लेकिन अब सरकार रोपवे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। जिससे श्रद्धालु मात्र नौ मिनट में यमुनोत्री मंदिर पहुंचेंगे।
रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी
चारधाम के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम करने के लिए सरकार रोपवे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है। सालों से चल रही कवायद के बाद यमुनोत्री में प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने से रोपवे की राह खुल गई है।खरसाली से यमुनोत्री मंदिर के लिए रोपवे की कुल लंबाई 3.5 किमी होगी। रोपवे के लिए वन मंत्रालय ने 3.838 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण करने के आदेश जारी किए हैं। जल्द ही पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर रोपवे का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
खरसाली से यमुनोत्री मंदिर तक रोपवे प्रस्तावित
यमुनोत्री धाम जाने के लिए खरसाली से यमुनोत्री मंदिर तक रोपवे प्रस्तावित है। इस रोपवे की कुल दूरी 3.5 किलोमीटर होगी। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने खरसाली गांव यमुनोत्री रोपवे का शिलान्यास किया था, लेकिन वन भूमि की मंजूरी न मिलने के कारण रोपवे निर्माण आगे नहीं बढ़ पाया है। रोपवे के लिए खरसाली गांव में स्थानीय लोगों की जमीन की अधिग्रहण किया गया था। 2021 में पर्यटन विभाग ने रोपवे निर्माण के लिए एक फर्म के साथ एमओयू करने की कवायद शुरू की थी, लेकिन यात्रियों की कम संख्या का हवाला देकर फर्म रोपवे का निर्माण करने के लिए तैयार नहीं हुई थी। अब वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने से रोपवे की राह खुल गई है। इस प्रोजेक्ट के बन जाने से रोपवे से श्रद्धालु मात्र नौ मिनट में यमुनोत्री मंदिर पहुंचेंगे।












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