Women's Day: जानिए उत्तराखंड के एक मात्र महिलाओं के 'वुमनिया बैंड' के बारे में, आसान नहीं रहा 9 साल का सफर

Women's Day: 9 साल पहले यानि 2016 में वूमेन्स डे पर यूपी के उन्नाव की रहने वाली स्वाती सिंह ने देहरादून में एक नई सोच के साथ काम शुरू किया। स्वाती ने प्रदेश के पहले महिला बैंड को लांच किया। इस सोच के साथ कि सिर्फ सिंगिंग ही क्यों पूरा बैंड महिलाओं का क्यों न​हीं हो सकता। नाम रखा गया वुमनिया बैंड।

आज 9 साल में वुमनिया बैंड एक नए मुकाम को छू रहा है, साथ ही समाज के लिए मिसाल भी पेश कर रहा है। स्वाती और उनके साथियों के वुमनिया बैंड को प्रदेश से लेकर देश तक कई उपलब्धियां हासिल हो चुकी हैं। वन इंडिया ने अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर वुमनिया बैंड के सफर पर बात की।

Women s Day Know about Uttarakhand only Womaniya Band journey of 9 years was not easy

वुमनिया बैंड की फाउंडर स्वाती सिंह यूपी के उन्नाव से हैं। स्वाती ने बताया कि जब वे म्यूजिकल बैंड को देखती तो उसमें सिर्फ सिंगित करती हुई कोई महिला नजर आती। बाकि सारे इंस्ट्रूमेंट पर हमेशा ब्वॉइज ही नजर आते। स्वाती ने उसी समय ये तय किया कि वे एक ऐसा बैंड तैयार करेंगी, जिसमें सिर्फ महिलाएं हों। नई सोच के साथ उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ इसके बारे में डिस्कश किया। स्वाती का मानना है कि समाज और लोग म्यूजिक फील्ड को ले​कर सीरिसस नहीं है।

लोगों को लगता है कि ये भी कोई करियर या फुल टाइम काम हो सकता है। लेकिन स्वाती ने ठाना कि पेशन या हॉबी को फुल टाइम बनाने में क्या दिक्कत है। बस फिर क्या वुमनिया बैंड को लांच किया गया और आज 9 साल का खूबसूरत सफर और यादें जुड़ गई हैं। स्वाती पहले यूपी में गर्वनमेंट जॉब पर थी।

जॉब छोड़कर उन्होंने देहरादून में कॉरपोरेट जॉब की फिर बाद में सबकुछ छोड़कर अपनी एकेडमी ज्वाइन की और 2016 में वुमनिया बैंड बनाया। धीरे धीरे काम मिलता रहा और आगे बढ़ते रहे। अब उत्तराखंड में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एम्बेसडर के साथ ही कई बड़े प्रोग्राम में परफॉर्म करती हैं। उन्होंने हर महिला को अपने मन और पेशन का काम करने की सलाह दी।

साथ ही कहा कि महिलाओं को खुद कमान संभालना होगा। डरें नहीं रिस्क लीजिए। वुमनिया बैंड में शुरूआत से ही स्वाती के साथ शाकुंबरी कोटनाला भी जुड़ी। जो कि 2016 से पहले अपना बिजनेस करती थी। म्यूजिक पेशन था तो सबकुछ छोड़कर बैंड ज्वाइन किया। लेकिन शुरूआत में शाकुंबरी के लिए संगीत बिल्कुल नया था। शाकुंबरी बताती हैं कि चुनौतियां बहुत थी मन का काम मिला तो सबकुछ छोड़ दिया।

शुरूआत में परिवार और करियर के बीच संतुलन बिठाना मुश्किल हो गया। इतना ही नहीं पिता को भी नहीं समझा पाई, कभी सपोर्ट नहीं किया। लेकिन जब एक बार कदम आगे बढ़ाया तो फिर पीछे मुडकर नहीं देखा। इतना ही नहीं बेटी को म्यूजिक से लगाव हुआ तो उसे भी बैंड में शामिल कर लिया अब दोनों मां बेटी एक साथ परफॉर्म कर रही हैं।

बेटी श्रेविता ने कहा कि वह बचपन से ही इस फील्ड में रही। पहले डांस करती थी। एक दिन मां और मैम ने सलाह दी कि ड्रम और इंस्ट्रूमेंट बजाओ। अब इसमें मजा आ रहा है। कहती हैं 10 साल से ये काम कर रही हूं इसके अलावा मैं कुछ करना नहीं चाहती। मम्मी के साथ रहना मेरे लिए डबल फायदेमंद है। बैंड की अन्य सदस्य शुभ्रांसी को बचपन से सिंगिंग का शौक था। कहती हें कि स्वाती मैम के साथ काम किया तो इंस्ट्रूमेंट बजाने का मौका मिला। जिसके बाद आज इस मुकाम पर पहुंच चुकी हैं। मेरे लिए बहुत खुबसूरत सफर है।

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