पूर्व सीएम हरीश रावत के बेटे आनंद की फेसबुक पोस्ट क्यों हो रही वायरल, जानिए किस शब्द को लेकर मचा हंगामा
हरीश रावत के बेटे आनंद रावत ने येड़ा शब्द का किया इस्तेमाल
देहरादून, 9 मई। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता हरीश रावत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार पूर्व सीएम हरीश रावत अपने बेटे आनंद रावत के एक फेसबुक पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया में लगातार वायरल हो रहे हैं। बीते दिनों आनंद रावत ने फेसबुक पर एक मुद्दे को लेकर अपनी राय रखी जिसमें उन्होंने हरीश रावत समेत कई नेताओं को इंगित किया। साथ ही लिखा कि मेरे पिताजी मेरे चिन्तन व विचारों से परेशान रहते है, शायद उन्होंने हमेशा मेरी बातें एक नेता की दृष्टि से सुनी और मुझे येड़ा समझा। इस पोस्ट के बाद से ही सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर हर कोई अपने तरीके से सवाल उठा रहे हैं। इस पोस्ट में येड़ा शब्द के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हरीश रावत ने दी सफाई
आनंद रावत के इस पोस्ट के बाद हरीश रावत ने अपने बेटे को फेसबुक के जरिए जबाव देते हुए लिखा कि आनंद मैंने तुम्हें कभी येड़ा नहीं समझा। वक्त ने मजबूरन समझा दिया। चाहे 2012 में लालकुआं हो या 2017 में जसपुर। हरदा लिखते हैं कि मुझे गर्व है, तुमने नशे से लड़ने के लिए उत्तराखंड के परंपरागत खेलों को प्रचारित-प्रसारित किया। कितने युवा नेता हैं जो तुम्हारी तरह युवाओं तक "रोजगार अलर्ट" के लिए रोजगार समाचार पहुंचाते हैं। कितने नेता है जो लड़के और लड़कियों को सेना या पुलिस में भर्ती हो सके इस हेतु प्रारंभिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करते हैं। तुम्हारी सोच पर मुझे गर्व है। आज जब सारी राजनीति हिंदू-मुसलमान हो गई है। रोजगार, महंगाई, सामाजिक समता व न्याय, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे प्रश्न खो गए हैं। मैंने रोजगार, शिक्षा को प्रथम लक्ष्य बनाकर काम किया। मैं ही खो गया। मैं रोजगार को केरल मॉडल पर लाया। तुलनात्मक रूप में सर्वाधिक तकनीकी संस्थान जिसमें नर्सिंग भी सम्मिलित हैं, हमारे कार्यकाल में खुले और सर्वाधिक भर्तियां हुई। आज शहर का मिजाज बदला हुआ है। परंतु तुमने बुनियादी सवाल और हम जैसे लोगों की कमजोरियों पर चोट की है। डठे रहो। बाप न सही-समय तुम जैसे लोगों के साथ न्याय करेगा।
विवाद होता देख आनंद ने भी दी सफाई
आनंद रावत के फेसबुक पोस्ट पर जब जमकर सवाल उठने लगे तो आनंद रावत ने सामने आकर येड़ा शब्द को परिभाषित किया है। आनंद रावत लिखते हैं कि येड़ा शब्द 2012 में तत्कालीन गृह मन्त्री सुशील कुमार शिन्दे के मुंह से अरविन्द केजरीवाल के लिए सुना और केजरीवाल ने इसे हिन्दी में जुनूनी शब्द कह करके व्याख्या की, और 2013 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल जी ने इस शब्द की सार्थकता साबित भी कर दी।
आनंद आगे लिखते हैं कि इतिहास के पन्ने पलटाए तो पाएंगे की जवाहरलाल नेहरू सम्पन्न व धनाड्य परिवार से आते थे, और देश की आज़ादी के लिए अपना ऐशो आराम त्याग कर जब पहली बार जेल गए होंगे तो उन्हें भी नहीं पता होगा, कि उनके जीवनकाल में देश आज़ाद होगा की नहीं। लेकिन एक येड़ापन, एक जुनून था देश के लिए और अपने जीवनकाल का एक बड़ा हिस्सा जेल में बिताया। आनंद ने सफाई देते हुए कहा है कि येड़ा मतलब पागल तो बिलकुल नहीं होता, क्योंकि संविधान के अनुसार पागल व्यक्ति जनप्रतिनिधि नहीं बन सकता, और येड़ा मतलब पागल होता तो केजरीवाल, शिंदे पर मानहानि का दावा कर चुके होते। उन्होंने कहा कि फ़िल्म अभिनेत्री जूही चावला भी तो कितनी मासूमियत से कहती येड़ा है, पर मेरा है। अब वो भला पागल को अपना तो बनाएंगी नहीं, हां एक जुनूनी व्यक्ति को अपना बना सकती है। आनंद रावत का कहना है कि मुझे लगता है, झकास के बाद सबसे लोकप्रिय शब्द येड़ाही है । उत्तराखंड की राजनीति में येड़ा शब्द पहली बार प्रयोग हुआ तो शालीन व बुद्धिजीवी प्रदेश के लोगों को नागवार लगा, जिसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूं। आनंद ने कहा कि मेरे पिताजी मेरे नायक है, और उनका जूझारूपन करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देता है ।












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