पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को क्यों कहना पड़ा...' नहीं तो घर बैठ जाऊंगा', जानिए क्या है मामला

मुख्यमंत्री बनने को लेकर सामने आया हरीश रावत का बयान

देहरादून, 16 फरवरी। मतदान के बाद सियासी दलों में जीत-हार के लिए गुणा भाग शुरू हो गए हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के एक बयान ने सनसनी फैला दी है। मतदान के ठीक बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से जीत को लेकर जब सवाल किया गया तो हरीश रावत ने कहा कि पार्टी के सत्ता में आने पर या तो वह मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर घर बैठ जाएंगे। तीसरा कोई विकल्प ही नहीं है। हरीश रावत के इस बयान के बाद से कांग्रेस के अंदर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जिसका असर आने वाले दिनों में भी नजर आना तय है।

मुख्यमंत्री बनने को लेकर सामने आया बयान

मुख्यमंत्री बनने को लेकर सामने आया बयान

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मुख्यमंत्री पद को लेकर बयानबाजी करते आ रहे हैं। पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने को लेकर उसके बाद चुनाव अभियान में फ्री हैंड देने को लेकर लगातार हरीश रावत और उनके समर्थकों की ओर से प्रेशर बनाया जाता रहा है। अब मतदान के बाद कांग्रेस जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, ऐसे में हरीश रावत की ओर से एक बयान सामने आया है। जिसे हरीश रावत का एक नया दांव माना जा रहा है।

45 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा

45 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा

हरीश रावत के बयानों की टाइमिंग को लेकर भी हमेशा सवाल खड़े होते रहे हैं। हरीश रावत ने कहा है कि वह अपनी सोच के अनुसार नया उत्तराखंड बनाना चाहते हैं, इसलिए वह किसी भी बात पर समझौता नहीं कर सकते हैं। एक इंटरव्यू में हरीश रावत ने कहा कि अब उनकी उम्र ऐसी नहीं रह गई है कि वह कुछ और सोचें। हरीश रावत या तो मुख्यमंत्री हो सकता है या घर बैठ जाए। इन दोनों के अलावा तीसरा कोई विकल्प नहीं है। एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरीश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह हाईकमान तय करेगा। जो भी निर्णय होगा, उन्हें स्वीकार होगा। मैं और मेरी बेटी, दोनों जीत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी 45 से 48 सीटें जीत रही है। इसका श्रेय उन्होंने राहुल गांधी को दिया।

लगातार करते आए हैं प्रेशर पॉलिटिक्स

लगातार करते आए हैं प्रेशर पॉलिटिक्स

हरीश रावत इस समय उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हैं। ऐसे में हरीश रावत को उम्मीद है कि सरकार आने पर वे ही मुख्यमंत्री के चेहरे होंगे। हालांकि विपक्षी साथियों से उन्हें डर भी है। हरीश रावत प्रदेश प्रभारी देवेन्द्र यादव के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल चुके हैं। इसके अलावा प्रीतम सिंह से भी उनकी दूरियां सार्वजनिक हो चुके हैं। इस तरह से हरीश रावत पहले ही हाईकमान तक ये संदेश पहुंचाना चाहते हैं, कि वे मुख्यमंत्री बनने के अलावा दूसरी कोई भी शर्त स्वीकार नहीं करेंगे। इधर हरीश रावत का लालकुंआ से चुनाव लड़ने को लेकर भी एक नया बयान मीडिया में सामने आ चुका है, जिसमें वे अपनी पहली पसंद रामनगर बता रहे हैं। हरीश रावत का ये बयान भी मतदान के बाद आया है। जिसमें उनकी बातों से साफ है कि वे रामनगर से ही चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन जिस तरह के हालात सामने आए, उन्हें रामनगर छोड़कर लालकुंआ जाना पड़ा। इस बयान के बाद भी कांग्रेस के अंदर सियासत गरमाई हुई है।

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