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उत्तराखंड में जिला पंचायतों में प्रशासकों को लेकर क्यों छिड़ा विवाद,गरमाई सियासत,संगठनों ने उठाई ये मांग

उत्तराखंड में जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक की जिम्मेदारी निर्वतमान अध्यक्षों को ही सौंपी गई है। जारी आदेश में कहा गया है कि छह महीने या नई जिला पंचायत का गठन होने तक जो भी पहले हो संबंधित जिले के जिला पंचायत के निवर्तमान अध्यक्ष ही वहां के प्रशासक होंगे।

हरिद्वार को छोड़ अन्य 12 जिला पंचायतों के निवर्तमान अध्यक्षों को ही वहां का प्रशासक नियुक्त किया गया है। जिसको लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश में निकाय के बाद अब ग्राम एवं क्षेत्र पंचायतों के बाद जिला पंचायतों के चुनाव भी टल गए हैं। जिसके बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

Why controversy broke out administrators district panchayat Uttarakhand politics raised demand

इस बीच जिला पंचायतों में प्रशासक निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष ही रहेंगे। जिसके बाद प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य भी अपना समानता का अधिकार मांग रहे हैं। संगठनों का कहना है कि प्रधान और क्षेत्र पंचायतों को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि पंचायती व्यवस्था, चाहे नगर पंचायत हो, चाहे ग्रामीण पंचायतें हों, जब चौपट ही करनी है तो फिर बेचारे हमारे ग्राम प्रधानों और ब्लॉक प्रमुखगणों ने क्या बिगाड़ा है? बल्कि वहां तो सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को आप प्रशासक बना रहे हैं और उनको भी प्रशासक बना दीजिए।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने जिप अध्यक्ष को प्रशासक बनाने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा 2016 मे एक्ट मे बदलाव को जवाबदेह बताया और कहा कि अब वह पंचायत प्रतिनिधियों के प्रति झूठी हमदर्दी जताकर घड़ियाली आंसू बहा रही है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को तथ्यों का भली भाँति अध्ययन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 मे तत्कालीन कांग्रेस नीत सरकार मे जिप अध्यक्ष को प्रशासक बनाने के लिए रूप रेखा तय की गयी थी।

पंचायत राज एक्ट में 2016 में संशोधन के तहत पंचायत राज एक्ट 2016,130/6 संशोधन में प्रशासक नियुक्ति का अधिकार है। जिला पंचायतों में प्रशासन बैठने का निर्णय राज्य हित में संविधान सम्मत निर्णय लिया गया है । प्रदेश के जिलों में विकास कार्य प्रभावित ना हो, इसीलिए उत्तरांचल पंचायत राज एक्ट के तहत प्रशासक बैठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत राज एक्ट मे ग्राम प्रधान या ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल बढाने का का कोई प्रविधान नहीं है। 2021 मे इसे लेकर हाई कोर्ट मे दायर याचिका भी खारिज हो चुकी है। हाईकोर्ट भी इस पर गाइड लाइन तय कर चुका है। सरकार द्वारा प्रशासक नियुक्त किए हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए। साथ नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार भी प्रशासक के बजाय शासन को दिए गए है।

जिला पंचायत सदस्य संगठन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि संविधान के तहत सबको एक समान अधिकार दे। इसके लिए जिला पंचायतो की तरह प्रधान और क्षेत्र पंचायतों को भी प्रशासक का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसको लेकर पंचायत प्रतिनिधियों का विरोध जारी रहेगा।

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