हरिद्वार से होकर क्या मिलेगा सत्ता का द्वार, उत्तराखंड की राजनीति में हरिद्वार क्यों है खास, जानिए
उत्तराखंड की राजनीति में हरिद्वार पर भाजपा, कांग्रेस और आप का फोकस
देहरादून, 19 नवंबर। उत्तराखंड में चुनावी वर्ष में सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से चुनाव प्रचार-प्रसार में जुटे हैं। सत्ता तक पहुंचने के लिए हर समीकरणों को साधने में जुटे हैं। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जब भी उत्तराखंड आता है तो साधु संतों का आशीर्वाद लेने हरिद्वार जरुर पहुंचते हैं। इसी तरह कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस हरिद्वार में परिवर्तन यात्रा निकाल चुकी है। और पूर्व सीएम हरीश रावत हरिद्वार पर ज्यादा फोकस रखते हैं। अब बारी आम आदमी पार्टी की है। आम आदमी पार्टी को भी इस बात का एहसास है कि हरिद्वार से ही उत्तराखंड की सत्ता का रास्ता पार हो सकता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल 21 नवंबर को हरिद्वार पहुंच रहे हैं। जिसमें वे बड़ी घोषणा कर सकते हैं।
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 21 नवंबर को उत्तराखंड के एक दिवसीय दौरे पर हरिद्वार आएंगे। वह तीर्थनगरी में रोड शो करने के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं को टिप्स देंगे। अरविंद केजरीवाल जब भी उत्तराखंड दौरे पर आते हैं कुछ बड़ा ऐलान जरुर करते हैं। इस बार वे हरिद्वार आकर भाजपा,कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।
आप प्रवक्ता नवीन पिरशाली ने कहा कि अरविंद केजरीवाल 21 नवंबर को हरिद्वार में रोड शो करेंगे। उन्होंने कहा कि आप पूरे प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का संकल्प ले चुकी है, हरिद्वार के बिना प्रदेश को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का सपना साकार नहीं हो सकता है। ऐसे में आप संकेत दे चुकी है कि वे हरिद्वार को लेकर किसी बड़े प्लान पर काम कर रहे हैं।
हिंदुत्व बना बड़ा मुद्दा
2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में हिंदुत्व बड़ा मुद्दा है। आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का ऐलान किया तो हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस भी कूद गई। भाजपा के सीनियर नेता जब भी उत्तराखंड आते हैं तो साधु संतों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह जब-जब देहरादून आए हरिद्वार पहुंचकर साधु संतों का आशीर्वाद लेना नहीं भूले। कांग्रेस ने हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा का काउंटर करना शुरू किया और श्री गणेश के नारे के साथ ही शिवालयों में जलाभिषेक भी करते दिखे। उत्तराखंड में कांग्रेस की चुनावी कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत के लिए भी हरिद्वार सबसे खास रही है। पहले सांसद के तौर पर हरिद्वार से प्रतिनिधित्व उसके बाद हरिद्वार ग्रामीण से ही विधानसभा चुनाव लड़ना। हालांकि विधानसभा का चुनाव वे हार गए। इस तरह से कांग्रेस भी हरिद्वार सीट पर ज्यादा फोकस करती है। हरिद्वार धर्म की नगरी, तीर्थ नगरी कही जाती है। जो कि पहाड़ और तराई के सेतु का काम भी करता है। यहां से तराई क्षेत्र शुरू हो जाता है। इस तरह हरिद्वार पर साधु संतों के अलावा किसानों का भी अच्छा प्रभाव है। उसके अलावा हरिद्वार का कुछ क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य वाले क्षेत्रों से भी लगा है। इस तरह से हरिद्वार राजनीति का केन्द्र बिंदु रहा है।












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