Badrinath: बदरीनाथ के घृतकंबल की धार्मिक मान्यता का क्या है रहस्य, पूरे देश के लोगों के लिए क्या मिला संकेत

बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने के साथ ही देशभर में सबसे ज्यादा जिस धार्मिक मान्यता और परंपरा की चर्चा रहती है वह है घृतकंबल पर घी की। जिससे देश की खुशहाली के जुड़े होने की सालों से मान्यता चली आ रही है।

इस बार भी कपाट खुलने के बाद तीर्थ पुरोहित देश के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। बदरीनाथ की मूर्ति को कपाट बंद करने के वक्त ओढ़ाया गया घृत कंबल जब हटाया गया तो उसपर घी पूरी तरह से लगा मिला।

What secret of religious belief Badrinath Ghritkambal what signal given to people of entire country

इतने कम तापमान होने पर भी घी सूखा नहीं। घृतकंबल पर घी का ना सूखना देश के लिए शुभ माना जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यदि बदरीनाथ के माथे की तरफ कंबल से घी सूख जाता है तो हिमालय क्षेत्र में सूखे की स्थिति पैदा होती है, और निचले हिस्से में घी सूखे तो देश में विपत्ति आती है।

भगवान बदरीनाथ को घृत कंबल से लपेटने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके पीछे की वजह शीतकाल में पड़ने वाली ठंड को माना जाता है। इससे पहले कंबल पर गाय का घी और केसर का लेप लगाया जाता है।

जिसके बाद उसे भगवान बदरीनाथ को ओढ़ाया जाता है। घृत कंबल को देश के प्रथम गांव माणा की महिलाओं के द्वारा तैयार किया जाता है।

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दिन घी के लेप लगे कंबल को बदरीनाथ के ओढ़ा जाता है और कपाट खुलने के दिन इस कंबल को तीर्थयात्रियों में प्रसाद के रुप में वितरित किया जाता है।

बदरीनाथ धाम की कई परंपराएं सालों से चली आ रही है। इसमें एक परंपरा ये भी है कि टिहरी राजा की कुंडली के आधार पर ही बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित होती है।

बदरीनाथ धाम में ताला खोलने का काम राजगुरु करते हैं। साथ ही जिसे तेल से सबसे पहले भगवना का अभिषेक होता है उसके लिए राजपरिवार की सुहागिन महिलाएं ही तेल पिरोती हैं। जिसे गाडू घड़ा कलश में लाया जाता है। जो कि कपाट के दिन डोली के साथ पहुंचाया जाता है।

क्या है घृत कंबल

मान्यताओं के अनुसार घृत कंबल, एक वस्त्र है जो भगवान बदरीनाथ पर लपेटा जाता है। इस कंबल को मांणा गांव की कन्याएं और सुहागिन मिलकर तैयार करती हैं। घृत कंबल बनाने के लिए कार्तिक माह में एक शुभ दिन चुना जाता है। उस दिन कन्याएं और सुहागिन, ऊन से सिर्फ एक दिन के भीतर ही कंबल को तैयार करती हैं। जिस दिन कंबल बनाना होता है उस दिन महिलाएं और कन्याएं उपवास रखती हैं।

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