मानसून के आगमन से पहले हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा में हुई भारी बर्फबारी, तीर्थयात्री ये बातें जरूर ध्यान रखें

चमोली। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा पर बर्फबारी हो रही है। मानसून के आगमन से पहले यहां का नजारा सर्दियों जैसा हो गया है। यहां हुई बर्फबारी को देखने पर लग रहा है जैसे सर्दियां लौट आई हों। ऐसी बर्फबारी को देखते हुए तीर्थयात्रियों के मूवमेंट पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। चमोली की एसपी श्वेता चौबे ने बताया कि, हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के चलते तीर्थयात्रियों को आगाह किया गया है।

मानसून के आगमन से पहले भारी बर्फबारी

मानसून के आगमन से पहले भारी बर्फबारी

यह तस्वीर हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा की ही है। आप देख सकते हैं कि इन दिनों क्या हाल है। हिमालयी प्रदेाश में स्थित यह ऐसी जगह है, जहां इन भरी गर्मियों में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तीर्थयात्रियों के लिए हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के पट 22 मई को खोले गए थे। तब से अब तक यहां हजारों तीर्थयात्री आ चुके हैं। हालांकि, अब चूंकि बर्फबारी हुई है तो तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए हेमकुंड की ओर जाने वालों को मौसम साफ होने तक घांघरिया और गोविंदघाट पर रोक दिया गया है।

विश्व प्रसिद्ध है हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा

विश्व प्रसिद्ध है हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा

हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जाने वाले तीर्थयात्रियों को कई पर्वतीय रास्तों से गुजरना पड़ता है। इन रास्तों की उंचाई सैकड़ों फीट है, जो कि खतरों से भरी चढ़ाई से गुजरते हैं। यह गुरुद्वारा भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है, जो समुद्र तल से करीब 4632 मीटर (15197 फूट) की ऊंचाई पर स्थित है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रांट है। वहीं, नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार और बस स्टैंड हरिद्वार और ऋषिकेश में है। यहां पहुंचने के लिए उत्तराखंड के इन तीनों शहरों में से किसी भी जगह से बस पकड़ कर पहले जोशीमठ जाना होगा। जोशीमठ से आपको जीप या टैक्सी द्वारा गोविन्द घाट जाना होता है। गोविन्द घाट से श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जाने के लिए लगभग 18 किमी. की ट्रैक करनी पड़ेगी।

यहां पहुंचना हर किसी के बस का नहीं

यहां पहुंचना हर किसी के बस का नहीं

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा भारत के सबसे पवित्र और सबसे कठिनाई भरे मार्गों वाले गुरुद्वारों में से एक माना जाता है। इस जगह का उल्लेख सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ में आता है। यहां बर्फबारी बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यह साल के कई महीनों तक तीर्थयात्रियों के लिए बंद कर दिया जाता है।

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