जंगल से चारा लेकर आ रही महिलाओं के साथ बदसलूकी का वीडियो वायरल, पहाड़ से लेकर मैदान तक शुरू हुआ विरोध
उत्तराखंड के चमोली में जंगल से चारा लाने पर विवाद प्रकरण
देहरादून, 19 जुलाई। उत्तराखंड के चमोली जिले के हेलंग क्षेत्र में जंगल से पशुओं के लिए चारा लेकर आ रही महिलाओं के साथ हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया में आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पहाड़ से लेकर मैदान तक इस मामले की जांच और कार्रवाई की मांग होने लगी है। उधर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए हैंं।
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क्या है वायरल वीडियो का मामला
चमोली के हेलंग में पशुओं के लिए चारा लेकर घर जा रही महिला के साथ पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों की ओर से बदसलूकी का मामला सोशल मीडिया में जमकर तूल पकड़ रहा है। आरोप है कि हेलंग घाटी से घास का गट्ठर लेकर आ रही दो महिलाओं से पहले पुलिसकर्मियों की नोकझोंक होती रही इसके बाद इन्हे थाने लाकर छह घंटे बैठाकर 250 रुपये का चालान भी थमा दिया गया। इस दौरान प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद थी। जिसके बाद इस पूरे विवाद का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही पहाड़ से लेकर मैदान तक पूरा प्रकरण तूल पकड़ने लगा।
उत्तराखंड महिला मंच ने शुरू किया आंदोलन, लगाए गंभीर आरोप
वीडियो वायरल होने के बाद राज्य आंदोलनकारियों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर रोष जताया है। देहरादून में उत्तराखंड महिला मंच संगठन ने इसका पुरजोर विरोध कर ज्ञापन सौंपा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 15 जुलाई को जोशीमठ प्रखंड के हेलंग गांव में जंगल से घास ला रही महिलाओं से न सिर्फ उनके घास के गट्ठर छीनते पुलिस व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान दिख रहे हैं बल्कि वीडियो में ही दिखता है कि एक महिला रो रही है, दूसरी के साथ छीना झपटी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य इस राज्य में, जो कि महिलाओं के आंदोलन व उनकी शहादत व कुर्बानियों के बदौलत बना, देखना बहुत शर्मनाक है दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी कोई सफाई नहीं हो सकती। महिला मंच की प्रदेश अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि उत्तराखण्ड में जल विद्युत परियोजनाओं के नाम पर हजारों हजार नाली नाप भूमि, जंगल, चरागाह की भूमि, पनघट, मरघट, पंचायत की भूमि, कम्पनियों को पहले ही दे दी गयी है । इसके बाद भी कम्पनियों की नीयत लोगों की सामूहिक हक- हकूक की भूमि को भी हड़प लेने की है। इससे आम ग्रामीणों के सम्मुख घास चारा लकड़ी का संकट पैदा हो गया है। यह घटना इसी का परिणाम है।
कंपनी पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने बताया कि विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के तहत हेलंग में सुरंग बनाने का कार्य कर रही कम्पनी द्वारा खेल मैदान बनाने के नाम पर जहां डम्पिंग ज़ोन बनाया जा रहा है, वह लोगों के पास चारागाह का अंतिम विकल्प बच गया है, वहां लोगों ने वृक्षारोपण कर इस भूमि को हरा भरा बनाया था।। डम्पिंग ज़ोन के नाम पर वहां हरे पेड़ काट दिए गए व चारागाह के इस अंतिम विकल्प को भी खत्म किया जा रहा है, जबकि कम्पनी के पास मलबा डम्पिंग के लिए विकल्प उपलब्ध हैं। साथ ही कहा कि यह विडंबना ही है कि उत्तराखण्ड के राजकीय पर्व हरेला के अवसर पर न सिर्फ हरियाली नष्ट की गई बल्कि उस हरियाली के रक्षकों पोषकों के साथ भी बदसलूकी की गई, उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनका चालान किया गया। आंदोलनकारियों ने इस घटना की इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।












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