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Vaikuntha Chaturdashi हरिद्वार में लाखों दियों से जगमग घाट,कमलेश्वर महादेव मंदिर में संतान के लिए अनुष्ठान

Vaikuntha Chaturdashi आज वैकुंठ चतुर्दशी पर्व मनाया जा रहा है। वैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पहले मनाई जाती है। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा सभा और प्रशासन ने गंगा घाट पर हर साल की तरह देव दीपावली एक दिन पहले मनाई। वैकुंठ चतुर्दशी के पर्व पर हरिद्वार में लाखों दिए जलाए जिससे पूरा घाट जगमग हुआ। गंगा आरती की समाप्ति के तुरंत बाद दीप जलाकर दिवाली मनाई गई।

उधर पौड़ी जिले के श्रीनगर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले में कमलेश्वर महादेव मंदिर में हर साल संतान प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान किया जाता है। जिसमें संतान के लिए ​पति पत्नी रात भर कमलेश्वर महादेव मंदिर में निसंतान दंपति पूरे रात हाथ में दिया लेकर भगवान से संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस अनुष्ठान के बाद निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति भी होती है।

Vaikuntha Chaturdashi

हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा के दिन नहीं बल्कि आज देव दीपावली मनाई गई। इसका कारण है कल गंगा स्नान के लिए होने वाली भीड़ को देखते हुए गंगा सभा और प्रशासन ने ये फैसला लिया है कि आज गंगा घाट पर हर साल की तरह देवदीपवाली मनाई।

देव दिवाली मान्यता

मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवता दिवाली मनाते हैं। पुराणों के अनुसार देव दिवाली के दिन ही भगवान विष्णु को बलीराजा से मुक्ति मिली थी, इसी दिन वो स्वर्ग पधारे थे। जिसके बाद सारे देवताओं ने दीप जलाकर खुशियां मनाई। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन मंदिरों में देव दिवाली मनाई जाती है। देवताओं द्वारा मनाई जाने वाली दीवाली धरती को ऊर्जा देती है। इस दिन देवताओं के निमित्त दीपदान का आध्यात्मिक महत्व है। देव दिवाली के दिन देवताओं के लिए दीपदान किया जाता है।

कमलेश्वर महादेव मंदिर में हर साल संतान प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान

पौड़ी जिले के श्रीनगर में बैकुंठ चतुर्दशी मेले में कमलेश्वर महादेव मंदिर में हर साल संतान प्राप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि कमलेश्वर महादेव मंदिर में दंपति अपनी मनोकामना पूर्ण करने के उद्देश्य से पूरी रात भगवान शिव की आराधना करते हैं। यहां पर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना होती है। जिससे पति प​त्नी की समस्याओं का निराकरण किया जा सके।

खड़ा दिया का अनुष्ठान

इस दिन देश विदेश से कई लोग अनुष्ठान में शामिल होते हैं। पौड़ी के श्रीनगर में हर साल बैकुंठ चतुर्दशी मेले में खड़ा दिया का अनुष्ठान किया जाता है। कमलेश्वर महादेव मंदिर में निसंतान दंपति पूरे रात हाथ में दिया लेकर भगवान से संतान प्राप्ति की कामना करते हैं।

मान्यता निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति

मान्यता है कि इस अनुष्ठान के बाद निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति भी होती है। सिद्वपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर में हर साल दंपति अपनी मनोकामना पूर्ण करने के उद्देश्य से पूरी रात भगवान शिव की आराधना करते हैं। यहां पर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है।

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