Uttarkashi Tunnel Rescue: ऑपरेशन सिल्क्यारा से ग्राउंड रिपोर्ट, बस कुछ घंटे का इंतजार
Uttarkashi Tunnel Rescue: मजदूरों के सुरंग के फंसने का 12वां दिन 22 नवंबर। सुरंग से करीब 200 मीटर दूर बैरिकेड लगाए गए हैं। यहां फोर्स तैनात की गई है। बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों, मजदूरों और बचाव से संबंधित अन्य लोगों के अलावा किसी को भी यहां से आगे जाने की अनुमति नहीं है। अचानक घटनास्थल पर हलचल बढ़ जाती है एम्बुलेंस तैनात है चर्चा है कि किसी भी वक्त मजदूरों को बाहर निकाले जा सकता हैं।
सुरंग के बाहर से क्रेन से एक पाइप टनल में पहुंचाई जा रही है। इससे आगे सिर्फ हम अंदाजा ही लगा सकते हैं।

60 मीटर तक पहुंचना है पाइप, अभी 45 पर
अधिकारियों से बात की तो पता चला कि ऑगर ड्रिलिंग मशीन चार दिन पहले 22 मीटर तक 900 मिमी व्यास वाले लोहे के पाइप मलबे में डाले गये थे, लेकिन अब आगे 800 मिमी के पाइप डाले जा रहे हैं। जो की 45 मीटर तक पहुंच गए हैं। करीब 60 मीटर तक पाइप को पहुंचना है।
बौखनाग देवता से उम्मीद, होगा सब ठीक
स्थानीय लोगों की एक टोली नजर आती है, पूछा तो बताते कि बौखनाग देवता सब ठीक करेगा। सब लोग ठीक-ठाक बाहर आएंगे। सब लोग पूरी कोशिश कर रहे हैं। दो दिन पहले यानी 20 नवंबर को बचाव दल 6 इंच का एक पाइप सुरंग के अंदर तक पहुंचाने में सफल रहे हैं। इससे पहले एक पतले पाइप से ही फंसे हुए लोगों से बात हो पा रही थी।
खाना-पानी पहुंचा, अब बाहर आने का इंतजार
6 इंच का पाइप के पहुंचने के बाद मजदूरों को पहले से ज्यादा खाना और अन्य जरूरत की चीजें दी जा रही हैं। इसी पाइप से एक कैमरा भी कुछ देर के लिए अंदर भेजा गया था, जिस पर अंदर फंसे मजदूरों की एक झलक नजर आई है। इससे यहां लोग आश्वस्त नजर आ रहे हैं। सुरंग के बाहर से यह अंदाजा लगाना संभव नहीं कि मजदूर ठीक किस जगह फंसे हो सकते हैं।
क्या है सिलक्यारा टनल प्रोजेक्ट, जिसमें हादसा हुआ
गंगोत्री से यमुनोत्री की तरफ जाते हुए सिलक्यारा गांव से राड़ी का डांडा शुरू होता है। यहां से लगातार 12 किमी चढ़ाई चढ़ते हुए राड़ी टॉप पहुंचते हैं। राड़ी टॉप से सड़क फिर उतार की है और 18 किमी नीचे उतरकर बड़कोट आता है। राड़ी का डांडा वाली सड़क ठंड के दिनों में लंबे समय तक बर्फ से ढकी रहती है। गंगोत्री और यमुनोत्री की इसी दूरी को कम करने और बर्फ से बचने के लिए सिलक्यारा सुरंग बनाई जा रही हैं।
चाय की दुकान पर बातचीत चल रही है राड़ी के डांडे पर ऊपर बौख नाग का मंदिर है। जहां सुरंग का मुहाना है, वहां पर भी बौख नाग का एक छोटा मंदिर था। सुरंग निर्माण के दौरान इस मंदिर को तोड़ा गया। हादसे के बाद सुरंग के मुहाने पर फिर से एक अस्थाई मंदिर बनाया गया है।
टनल और उसके आसपास लोगों की संख्या 500 के आसपास है। इनमें अधिकारी, मजदूर, सुरक्षा कर्मचारी और पत्रकारों के साथ ही स्थानीय लोग हैं।












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