Uttarkashi Tunnel Rescue: दिवाली में हुआ था अंधेरा अब इगास पर्व पर आएगा उजाला
Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड में दिवाली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाया जाता है। जिस तरह से रेस्क्यू टीम दावा कर रही है कि कल सुबह (22 नवंबर) तक मजदूरों को रेस्क्यू किया जा सकता है। ऐसे में दिवाली की सुबह टनल में फंसे 41 मजदूरों के लिए उत्तराखंड की दिवाली यानी इगास पर्व मनाने की उम्मीद अब जाग गई है।
12 नवंबर को दिवाली की सुबह 41 मजदूर सिल्कियारा टनल में फंस गए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए 11 दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि कल सुबह गुरुवार तक सभी मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल दिया जाएगा। इसके बाद ही उत्तराखंड में इगास नए उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

पहाड़ में बग्वाल दीपावली के ठीक 11 दिन बाद ईगास मनाने की परंपरा है। ईगास-बग्वाल नाम दिया गया। ईगास-बग्वाल के दिन आतिशबाजी के बजाय भैलो खेलने की परंपरा है। खासकर बड़ी बग्वाल के दिन यह मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है।
आचार्य राकेश पुरोहित ने कहा कि बग्वाल वाले दिन भैलो खेलने की परंपरा पहाड़ में सदियों पुरानी है। भैलो को चीड़ की लकड़ी और तार या रस्सी से तैयार किया जाता है।
रस्सी में चीड़ की लकड़ियों की छोटी-छोटी गांठ बांधी जाती है। जिसके बाद गांव के ऊंचे स्थान पर पहुंच कर लोग भैलो को आग लगाते हैं। इसे खेलने वाले रस्सी को पकड़कर सावधानीपूर्वक उसे अपने सिर के ऊपर से घुमाते हुए नृत्य करते हैं। इसे ही भैलो खेलना कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी सभी के कष्टों को दूर करने के साथ सुख-समृद्धि देती है।
39 मीटर पाइप हुई ड्रिल, 25-30 मीटर की ड्रिलिंग बाकी
आपको बता दें कि बुधवार को टनल के अंदर 41 मजदूरों को बचाने के लिए टनल के एंट्री पॉइंट से ऑगर मशीन करीब 90 मीटर तक 800 mm का पाइप ड्रिल कर चुकी है। अब लगभग 25-30 मीटर की ड्रिलिंग बाकी है। आज शाम या कल तक ड्रिलिंग पूरी होने की उम्मीद है।












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