Uttarkashi भूवैज्ञानिक दल ने आपदा प्रभावित क्षेत्र धराली-हर्षिल का किया दौरा, अस्थायी झील को लेकर उठाए ये कदम

Uttarkashi dharali disaster उत्तराखण्ड सरकार और औद्योगिक विकास विभाग द्वारा गठित भूवैज्ञानिक दल ने आपदा प्रभावित क्षेत्र धराली-हर्षिल का दौरा किया। भूवैज्ञानिक ने धराली आपदाग्रस्त का भूगर्भीय निरीक्षण करते हुए सम्भावित खतरे एवं बचाव के लिए उपाय का अध्ययन किया।

टीम के अध्ययन में पता चला कि हर्षिल में विशेष रूप से नगर के सामने ऊपरी हिस्से में और सेना शिविर के पास एक स्थानीय धारा (गदेरा) तेलगाड़ तीव्र वर्षा के कारण सक्रिय हो गई। इस गदेरे में बड़ी मात्रा में मलबा और पानी आकर भागीरथी नदी के संगम पर जमा हो गया और दाहिने किनारे पर एक अस्थायी झील का निर्माण किया।

Uttarkashi Geological team visited disaster affected area Dharali-Harsil steps temporary lake

नई बनी झील की लंबाई लगभग 1,500 मीटर थी और इसकी अनुमानित गहराई 12 से 15 फीट थी। जलभराव ने न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से और एक हेलीपैड को डुबो दिया, बल्कि हर्षिल में भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया, इस घटना ने भागीरथी नदी के स्थलाकृति को काफी बदल दिया।

बताया गया कि पहले दाहिने किनारे पर स्थित रेत का टीला कट किया गया, जबकि कटे हुए रेत के टीले के विपरीत बाईं ओर अवसाद जमा हो गया, जिसमें जीएमवीएन गेस्ट हाउस के एक हिस्से की हानि शामिल थी। भूवैज्ञानिक टीम के बीते 12 अगस्त 2025 को किये गये निरीक्षण से पता चला कि भागीरथी नदी का बायां किनारा संतृप्त जलोढ़ पंख द्वारा अवरुद्ध था।

क्षेत्र के आंकड़ों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर, भूवैज्ञानिकों ने आंशिक प्रवाह को बहाल करने के लिए एक आपातकालीन वैज्ञानिक मलबा निकासी और चैनेलाइजेशन योजना तैयार की। योजना में धीरे-धीरे रुके हुए पानी को छोड़ने के लिए लगभग 9-12 इंच गहराई के छोटे विचलन चैनल बनाने शामिल थे।

जिला मजिस्ट्रेट, उत्तरकाशी और अरुण मोहन जोशी, आईजी पुलिस (बचाव और प्रतिक्रिया अभियान के प्रभारी) के साथ चर्चा के दौरान, यह जोर दिया गया कि झील के बहिर्वाह चैनलों को तीन या चार चरणों में खोला जाना चाहिए ताकि अचानक नीचे की ओर बाढ़ न आए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) एंव सिंचाई विभाग उत्तरकाशी द्वारा तत्काल कार्य शुरू किया गया।

प्रथम दिन तीन उचित ढाल मापने के बाद चैनल निर्माण का कार्य शुरू किया गया। मैनुवल कार्य करते हुए, उसी दिन शाम तक पानी का स्तर सभी तीन चैनलों को सक्रिय करने के लिए पर्याप्त बढ़ गया और नदी के बाईं ओर जमा अवसाद निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रवाहित हो गया।

अगले दिन पुनः प्रक्रिया अपनाते हुए कार्य किया गया है। जिलाधिकारी उत्तरकाशी के साथ भूवैज्ञानिक दल द्वारा हर्सिल झील क्षेत्र का मुआयना किया गया, जिससे झील का जलस्तर नियंत्रित व निचले भागों में जमा मलवा स्वतः नदी के कटाव से निस्तारित हो गया। इससे झील के मुहाने का विस्तार हुआ।

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