Uttarkashi Cloudburst तीसरे दिन शुरू हुई हेलीकॉप्टर से मिशन जिंदगी, 70 नागरिकों को बचाया गया
Uttarkashi Cloudburst उत्तरकाशी के धराली में आई बाढ़ के बाद सरकार, सेना और रेस्क्यू एजेंसियों का मिशन जिंदगी जारी है। सड़कें बंद होने और कनेक्टविटी बाधित होने के बाद अब हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू शुरू हो गया है। मौसम खुलते ही आज तीसरे दिन मातली से हर्षिल के बीच शटल सेवा शुरू कर दी गई है।
इसमें कुल 08 हेलीकॉप्टर को लगाया गया है। भारतीय सेना के ताजे अपडेट के मुताबिक अब तक 70 नागरिकों को बचाया गया। 3 नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है और 50 से ज़्यादा लोग लापता हैं। 1 जेसीओ और 8 जवान लापता हैं, जबकि 8 नागरिकों को उत्तरकाशी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और 2 शव बरामद हुए हैं।

इस पूरे रेस्क्यू अभियान में यूकाडा के हेलीकॉप्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तरकाशी से ही कैंप कर धराली आपदा के साथ ही पूरे प्रदेश के हालातों पर नजर रखे हुए हैं। उत्तरकाशी धराली में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुए रास्तों को खोलने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद से पोकलैंड मशीनों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन के जवान दिन-रात इन रास्तों को साफ करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ग्राउंड जीरो पर पहुंचे
मौसम की चुनौतियों के बीच पहले सार्टी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। दूसरी सार्टी के जरिये जिलाधिकारी उत्तरकाशी और एसपी उत्तरकाशी घटनास्थल पर पहुंचे। वहीं अन्य सार्टी में जिला प्रशासन की टीम, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के कुल 22 लोग ग्राउंड जीरो पर पहुंचे।
एनडीआरएफ हेलीकॉप्टरों के जरिये धराली पहुंच चुके
एनडीआरएफ के 28 जवान भी 02 सेटेलाइट फोन के साथ यूकाडा के हेलीकॉप्टरों के जरिये धराली पहुंच चुके हैं। वहीं यूकाडा के हेलीकॉप्टरों ने सेना के ले. कर्नल समेत 10 जवानों का धराली से रेस्क्यू किया है। सेना के 02 घायलों को हेलीकॉप्टर से हायर सेंटर भेजा गया है, दो अन्य को सड़क मार्ग से एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से एम्स ऋषिकेश भेजा जा रहा है।
उपचार के लिए जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी में भर्ती कराया गया
शेष अन्य का उपचार मातली तथा जिला चिकित्सालय में किया जा रहा है। इन्हें उपचार के लिए जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी में भर्ती कराया गया है। राज्य प्रशासन, सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ और यहां तक कि स्थानीय लोग भी खोज और बचाव कार्यों में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।












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