Uttarkashi Cloudburst: धराली आपदा में जारी है अपनों को तलाश, परिजन परेशान कहां गए लापता, Ground report
Uttarkashi Cloudburst Ground report: उत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त को आई आपदा को 10 दिन से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन अब भी कई परिजन अपनों की तलाश कर रहे हैं। रोड कनेक्टविटी न होने से परिजन परेशान होकर पैदल ही धराली पहुंच रहे हैं, तीन से चार दिन तक अपनों को जगह-जगह और जंगल में भी तलाश रहे हैं।
अपनों की तलाश में ग्रामीण, परिजन कई किमी तक दर दर भटकने को मजबूर हैं। लेकिन जब अपनों के बारे में कुछ भी पता नहीं चल रहा है, तो थक हार कर निराश होकर अपने घरों को लौट रहे हैं। ऐसे ही कुछ लोगों से वन इंडिया ने ग्राउंड पर जाकर बातचीत की।

उत्तरकाशी के धौंतरी इलाके के रहने वाले शेर सिंह ने बताया कि उनके तीन बच्चे धराली में एक ढ़ाबा चलाते थे। इनमें से एक तो सकुशल घर पहुंच गया लेकिन दो का पता नहीं चल पाया है। जो कि 5 अगस्त के बाद से लापता हैं। उन्होंने तीन दिन तक धराली और आसपास के जंगल, गांवों में भटकने के बाद जब कुछ पता नहीं चल पाया तो वे उत्तरकाशी लौट आए हैं। शेर सिंह ने बताया कि जिस तरह का मंजर धराली में है, ऐसे में वहां अब बॉडी मिलना मुश्किल है।
उन्होंने बताया कि गांव के 4 लोग अपनों की तलाश में निकले थे। 20 किमी से ज्यादा पैदल चलकर धराली पहुंचे और फिर इतने ही पैदल चलकर वापस पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने मदद का आश्वासन दिया है। कीर्ति सिंह ने बताया कि उनके दो बच्चे गायब हैं। जो कि धौंतरी के लुदाड़ा गांव के रहने वाले हैं। तीन बच्चे 20 से 22 साल के धराली में होटल में काम करते थे, जिनमें से एक किसी तरह बचकर पैदल चलकर गांव पहुंच गया, लेकिन दो को नहीं बचा पाया।
कीर्ति सिंह बताते हैं कि 5 अगस्त को एक बजे तक बच्चों की परिजनों से बात की थी, लेकिन उसके बाद से फोन बंद आ रहा है। जो बच्चा बच गया, उसने बताया कि बहुत तेज आवाज आई, किसी ने मारा हाथ खींचा कि भागो। जो दो दूसरे बच्चे थे, वे गोदाम में थे, उनको आवाज मारी लेकिन उन्होंने सुना नहीं। इस तरह वे नहीं बच पाए।
रमेश बुटोला ने बताया कि हम चारों लोग एक साथ दो बच्चों की तलाश में निकले हैं। लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा है। रमेश ने बताया कि जंगल से लेकर मलबे में पूरा तलाश लिया है। उन्होंने बताया कि लोगों का कहना है कि धराली आपदा में 68 लोग लापता हैं। 40 से 50 फीट मलबा है। कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है। हमारे बच्चों का कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। अब थक हार कर घर लौट रहे हैं।












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