Uttarkashi धराली आपदा में कहां हैं लापता, पुल और रोड कनेक्टिविटी से जगी आपदा प्रभावितों की आस, जानिए कैसे
Uttarkashi cloudbrust Dharali उत्तरकाशी की धराली आपदा के पांचवे दिन भी सेना, प्रशासन और रेस्क्यू टीमें सड़क कनेक्टविटी को जोड़ने के लिए पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सड़क मार्ग को दुरस्त करने की है। लेकिन पहले दिन से प्रकृति रेस्क्यू टीमों के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर रहा है।
पहले भटवाड़ी उसके बाद गंगनानी में सड़क मार्ग और पुल ध्वस्त होने से नई चुनौतियां सामने आ रही है। जिसके लिए प्रशासन और सेना दिन रात एक कर सड़क मार्ग को ठीक करने में जुटी है। अब वैली ब्रिज के जरिए कनेक्टविटी को दुरस्त करने की कोशिश की जा रही है।

धराली तक अभी सिर्फ हवाई मार्ग से ही रेस्क्यू कार्य किया जा रहा है। कई फीट तक आए मलबे को हटाने के लिए मशीनों को जरूरत पड़ेगी जो कि सड़क मार्ग से ही संभव है। ऐसे में जिनके अपने लोग लापता हैं, उनकी आस अब कनेक्टविटी पर टिकी हुई है। जब तक धराली तक सड़क मार्ग दुरस्त नहीं हो जाता तब तक आपदा प्रभावितों की आस जगी हुई है।
अब तक 700 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। जबकि 200 से ज्यादा लोगों के मिसिंग होने का दावा किया जा रहा है। गंगोत्री नेशनल हाईवे पर टूटे लिम्चा गाड़ पुल की जगह बनाए जा रहे वैली ब्रिज पर आवाजाही शुरू की जा सकती है। चीफ इंजीनियर शिवालिक के.बी. नागराज ने इसकी पुष्टि की है। प्राकृतिक आपदा के चौथे दिन मोबाइल सेवा आंशिक रूप से बहाल कर दी गई है। वहीं गंगनानी के समीप लिम्चा गाड़ पुल के स्थान पर वैली ब्रिज का निर्माण अंतिम चरण में है।
बीआरओ और सेना की बंगाल इंजीनियरिंग यूनिट'' के 40 जवान लगातार काम में जुटे हैं। चीफ इंजीनियर के.बी. नागराज ने कहा कि शाम तक पैदल और हल्के वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। बीआरओ कमांडर राज किशोर ने बताया कि वैली ब्रिज तैयार होने के बाद डबरानी क्षेत्र में भी तेज़ी से मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा, जहाँ सड़क बह गई है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ज़िप लाइन से आज 35 लोगों को सुरक्षित पार कराया गया। वहीं लिम्चा गाड़ से बीआरओ के 40 मजदूरों को भी रेस्क्यू किया गया।












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