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कहीं 2021 का इतिहास तो नहीं दोहराएगा उत्तराखंड, वनाग्नि की घटनाओं ने बढ़ाई मुश्किलें, जानिए कैसे

पहाड़ के जंगलों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ गई

देहरादून, 12 अप्रैल। उत्तराखंड में गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। जिस तेजी से आग की घटनाएं सामने आ रही हैं, उसने 2021 की यादें ताजा कर दी हैं जब​ आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार को केन्द्र सरकार की मदद लेनी पड़ी थी। इतना ही नहीं हेलीकॉप्टर के जरिए जंगलों की आग पर काबू पाया गया था। अप्रैल के माह में ही आग की घटनाओं की संख्या में तेजी आना इस बात ​की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि शासन और प्रशासन इसको लेकर अलर्ट नजर आ रहे हैं।

Uttarakhand will not repeat the history of 2021, the incidents of forest fire have increased the difficulties, know how

पहाड़ के जंगलों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ी

उत्तराखंड के जंगलों में इस बार भी आग बेकाबू होती जा रही है। पहाड़ के जंगलों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ गई हैं। इससे लाखों-करोड़ों की वन संपदा को नुकसान पहुंचने के साथ ही वन्यजीवों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। प्रदेश में 15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन में अब तक 313 वनाग्नि की घटनाएं रिपोर्ट की जा चुकी हैं। जबकि वर्ष 2021 में प्रदेश में बीते 12 वर्षों में सर्वाधिक 2813 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं थीं। तब वनों की आग पर काबू पाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टरों को मोर्चे पर उतारना पड़ा था। जिसमें 3943.88 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ था। जबकि लाखों रुपये की क्षति का आकलन किया गया था। बीते वर्ष उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग को बुझाने के प्रयास युद्ध स्तर पर किए गए। जंगल में लगी आग बुझाने के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए गए। जिसमें MI-17 हेलीकॉप्टर की भी मदद ली गई। इस बार भी बढ़ते तापमान के कारण वनाग्नि की घटनाएं लगाता बढ़ती जा रही हैं।

इस बार वन मुख्यालय की ओर से मॉडल क्रू स्टेशन की परिकल्पना
फायर सीजन (15 फरवरी से 15 जून) के दौरान वन विभाग हर हाल करीब 17 सौ से अधिक क्रू स्टेशन स्थापित करता है, मगर इनमें अधिकांश अस्थायी होते हैं। वन क्षेत्रों में आग की सूचना मिलने पर इनमें तैनात कामर्कि व श्रमिक आग बुझाने में जुटते हैं। इस बार राज्य के 13 जिलों में अब तक 1317 क्रू स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इस बार वन मुख्यालय की ओर से मॉडल क्रू स्टेशन की परिकल्पना की गई है। प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों में 40 मॉडल क्रू स्टेशन लगभग बनकर तैयार हो गए हैं। इनमें कुछ काम करने लगे हैं, लेकिन जिस उद्देश्य से इन्हें बनाया गया था, उसको पूरा होने में अभी समय लगेगा। हालांकि इस वर्ष इस सीजन में जंगलों में लगने वाली आग को बुझाने में इन मॉडल क्रू स्टेशनों से बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में अगले तीन साल के भीतर वन क्षेत्रों में ऐसे दो सौ मॉडल क्रू-स्टेशन बनाने का लक्ष्य है।

सबसे ज्यादा अल्मोड़ा में आग की 36 घटनाएं दर्ज

पिछले 24 घंटे में 88 जगहों पर जंगल में आग लगी है। इसमें सबसे ज्यादा अल्मोड़ा में आग की 36 घटनाएं दर्ज की गई।अब तक आग की घटनाओं के मामले में बागेश्वर 57 घटनाओं के साथ दूसरे और उत्तरकाशी 56 घटनाओं के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं, नैनीताल जिले के विभिन्न प्रभागों में इस सीजन में आग लगने की 20 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें करीब 21 हेक्टेयर जंगल जल चुका है।

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