इस दिन शुरू होगी कांवड़ यात्रा जानिए इसका धार्मिक महत्व, उत्तराखंड सरकार करेगी कांवड़ियों का खास स्वागत

14 जुलाई से कांवड़ यात्रा, हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा

देहरादून, 20 जून। 14 जुलाई से शुरू होने जा रही कांवड़ यात्रा के लिए इस बार उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश सरकार खासा तैयारियों में जुटी हुई है। वेस्ट यूपी के साथ साथ इस बार उत्तराखण्ड में भी कांवड़ियों का जोरदार स्वागत करने की तैयारी हो रही है। कोविड के चलते इस बार कांवड़ यात्रा में जबरदस्त भीड़ जुटने की उम्मीद लगाई जा रही है। जिसे देखते हुए इस बार दोनों सरकारों ने कांवड़ियों का स्वागत जोरदार तरीके से करने का ऐलान किया है। उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बीते दिनों कहा था कि कोविड महामारी के कारण दो साल से कांवड़ यात्रा बाधित रही। ऐसे में इस बार कांवड़ यात्रियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी।

दो साल बाद हो रही यात्रा, उत्साह की उम्मीद
सावन मास में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। यात्रा के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को तैयारियां करनी होती है। जिसके लिए दोनों सरकारों ने तैयारियां तेज कर दी है। इस बार कांवड़ियों को हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा करने की तैयारी है। कोविड के कारण 2 साल तक यात्रा नहीं हो पाई। ऐसे में इस बार यात्रा में जबरदस्त उत्साह नजर आने की संभावना है। जिसको लेेकर सरकार की ओर से तैयारियां शुरू हो गई है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। इसके लिए सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन को भी कांवड़ यात्रा को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भावना व्यक्त की है कि कांवड़ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी। महाराज ने कहा कि कांवड़ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे कोविड के अनुरूप व्यवहार का पालन करें।

कांवड़ यात्रा क्या है
हर साल श्रावण मास में लाखों की संख्या में कांवड़िये सुदूर स्थानों से आकर गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस यात्राको कांवड़ यात्रा बोला जाता है। श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है। यह यात्रा शिव भक्तों के लिए सबसे खास मानी जाती है। सावन मास भोले भगवान का सबसे खास महीना माना जाता है। इस पूरे माह में महादेव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म की मान्यता है कि यदि कोई जातक सावन महीने में प्रत्येक सोमवार को पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखता है, तो उसे भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। हर साल श्रद्धालु भोले को खुश करने के लिए कांवड़ यात्रा निकालते हैं।

ये है पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि पहला कांवड़िया रावण था। वेद कहते हैं कि कांवड़ की परंपरा समुद्र मंथन के समय ही पड़ गई। उस दौरान जब मंथन में विष निकला, तो संसार इससे त्राहि-त्राहि करने लगा। उस समय सृष्टि की रक्षा के लिए शिवजी ने उस विष को पी लिया लेकिन अपने गले से नीचे नहीं उतारा। जहर के प्रभाव से भोलेनाथ का गला नीला पड़ गया। इस वजह से उनका नाम नीलकंठ पड़ा। कहा जाता है कि रावण कांवड़ में गंगाजल लेकर आया था। उसी जल से उसने शिवलिंग का अभिषेक किया। तब जाकर शिवजी को विष से राहत मिली।

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