Kashipur firing case : यूपी और उत्तराखंड पुलिस आई आमने-सामने, योगी और धामी की फिर से अग्निपरीक्षा होगा ये मसला
काशीपुर फायरिंग को लेकर दोनों राज्यों की पुलिस आमने -सामने
उत्तर प्रदेश में योगी और उत्तराखंड में धामी सरकार आने के बाद से दोनों पड़ोसी राज्यों के संबंध बेहतर होने के दावे किए गए। परिसंपत्तियों के विवाद से लेकर कई मसलों पर दोनों राज्यों की सरकार ने बैठकर मुद्दों को अब तक सुलझाने का प्रयास किया, जिसमें काफी हद तक दोनों राज्य सफल हुए लेकिन एक बार फिर यूपी व उत्तराखंड आमने सामने है। इस बार मामला पुलिसिंग से जुड़ा है।

मुकदमेबाजी में भी दोनों प्रदेश की पुलिस उलझी
यूपी के खनन माफिया जफर को पकड़ने आई यूपी पुलिस और उत्तराखंड के काशीपुर में गोली लगने से महिला की मौत के बाद से दोनों पुलिस अपना-अपना दावा मजबूत करने में जुटी है। इतना ही नहीं मुकदमेबाजी में भी दोनों प्रदेश की पुलिस उलझी हुई है। ऐसे में सवाल ये खड़ा हो रहा है कि यूपी के सीएम योगी और उत्तराखंड के सीएम धामी इस मसले को किस तरह से सुलझाते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 36 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई
उत्तर प्रदेश पुलिस ने भाजपा नेता भुल्लर और जफर अली समेत 36 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसके जबाव में उत्तराखंड से डीआईजी कुमांउ नीलेश आनंद भरणे ने डीआईजी मुरादाबाद को पत्र लिख कर पूछा है कि पुलिस यहां क्यों आई थी और फिर बिना बताए क्यों चली गई। उत्तराखंड की 7 टीमें जांच में जुटी हैं। कुंडा थाना पुलिस को यूपी दबिश देने के लिए भेजा गया। जिससे आरोपी जवानों को पुलिस गिरफ्तार कर सके। इसके बाद यूपी पुलिस ने जफर के अलावा भाजपा नेता गुरताज सिंह समेत 36 पर डकैती, जानलेवा हमले समेत 18 गंभीर धाराएं लगाई गई है।

यूपी पुलिस की अब तक कहानी
यूपी पुलिस की अब तक कहानी के अनुसार 12 अक्टूबर को शाम 5 बजे खनन माफिया जफर के कमालपुरी चौराहे के पास चौपहिया वाहन से आने की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी की। करीब पौने 6 बजे जफर कार से सूरजनगर की और से निकला। पुलिस ने उसे वहां रोकने का प्रयास किया लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस उसका पीछा करते हुए उत्तराखंड के भरतपुर गांव पहुंची। जहां जफर भुल्लर के घर घुसा। आरोप है कि यहां कुछ लोगों ने दरवाजा बंद कर पुलिस टीम को लाठी ठंडे से पीटा, गाड़ी में तोड़ फोड़ की और आग लगाने की कोशिश की।

यूपी और उत्तराखंड सरकार आमने- सामने
ऐसा पहली बार नहीं है जब यूपी और उत्तराखंड सरकार आमने सामने आ गई है। ऐसे में ये माना जा रहा है कि एक बार फिर योगी और धामी की अग्निपरीक्षा है। इस पुलिसिंग कार्रवाई को लेकर जिस तरह दोनों प्रदेश की पुलिस आमने सामने है। उसमें सरकार किस तरह से इस मसले पर बीचबचाव करती है। ये देखना अभी बाकि है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के साथ हुए परिसंपत्तियों के बंटवारे पर भी योगी और धामी सरकार के फैसले को लेकर कई तरह के आरोप लगे। 21 साल बाद उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों को लेकर बंटवारे का दावा किया गया।

कई तरह के पेंच फंसे
यूपी के सीएम योगी और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने आपसी सहमति से बताया कि अलकनंदा होटल उत्तराखंड सरकार को मिला जबकि यूपी सरकार को भागीरथी होटल मिल गया। आपसी सहमति से समाधान निकला, जिसके तहत उत्तराखंड सरकार यूपी सरकार को जमीन देगी और उस पर यूपी नया पर्यटन आवास बनाएगा। लेकिन इस निर्णय पर भी कई तरह के पेंच फंसे हुए नजर आए।












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