Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Uttarakhand UCC: मुस्लिम महिलाओं को पैतृक संपत्ति में मिलेगा समान अधिकार, बहुविवाह पर भी बैन?

Uttarakhand Uniform Civil Code:उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने पर मुस्लिम महिलाओं के लिए अच्छे दिन आ सकते हैं। उन्हें पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार मिल सकता है।

Uttarakhand Uniform Civil Code: Panel may suggest to end polygamy practice, Muslim women may get equal rights in ancestral property

उत्तराखंड देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला बीजेपी शासित राज्य बन सकता है। कर्नाटक चौथा राज्य है, जहां पार्टी ने इसका वादा किया है। जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने इसके लिए जो पांच सदस्यीय पैनल बनाया हुआ है, उसके प्रस्तावों में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर खास फोकस किया जा रहा है।

महिला अधिकारों पर जोर रहने की संभावना
उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य है, जहां बीजेपी ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) लागू के वादा चुनाव घोषणा पत्र में शामिल किया था। राज्य सरकार ने इसपर सुझाव देने के लिए पांच सदस्यीय एक पैनल बनाया हुआ है। जिसके संभावित प्रस्ताव अब सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इस सुझाव के केंद्र में मुस्लिम महिलाएं हो सकती हैं।

पैतृक संपत्ति में मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिल सकता है- रिपोर्ट
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह पैनल उत्तराखंड सरकार को अपनी जो रिपोर्ट देने वाला है, उसमें मुस्लिम महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार यानि 50% शेयर देने का सुझाव शामिल हो सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं को पैतृक संपत्ति में 25% हिस्सेदारी मिलती है।

हिंदू महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिला अधिकार
दरअसल, 2005 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिंदू महिलाओं को पैतृक संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार मिल गया है। इसी सिद्धांत के आधार पर उत्तराखंड यूसीसी पैनल भी मुस्लिम महिलाओं को पैतृत्क संपत्ति में समान अधिकार देने पर मंथन कर रहा है।

बहुविवाह प्रथा पर भी लग सकती है रोक
इस रिपोर्ट के अनुसार मुसलमानों में जो कुछ परिस्थितियों में बहुविवाह और बहुपतित्व (polyandry) प्रथा है, उसे नकारे जाने की भी संभावना है। कुछ आदिवासियों में भी ऐसी परंपरा रही हैं। लेकिन,आंकड़ें बताते हैं कि आधुनिक समय में ऐसे मामले कम हो रहे हैं। इसी तरह हिंदू संयुक्त परिवार में पुरुष उत्तराधिकरी के coparcenary अधिकार (जन्म से पैतृक संपत्ति पर अधिकार) को भी अलग रखा जा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह पहले ही तय हो चुका है।

पैनल की आखिरी दौर की बैठकें जारी
जानकारी के मुताबिक इन सभी मसलों पर जनता से भी राय जुटाई गई है और उनके मजबूत समर्थन के बाद ही इसे पैनल अपने ड्राफ्ट में शामिल कर सकता है। जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना देसाई की अध्यक्षता वाला पांच-सदस्यीय पैनल अब संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत सबको समान अधिकार देने की ड्राफ्ट योजना को तैयार करने के लिए आखिरी दौर की बैठकें कर रहा है।

निराश्रित माता-पिता के अधिकारों पर भी मंथन
इस पैनल के पास निराश्रित माता-पिता के अधिकारों का मामला भी विचाराधीने है। क्योंकि, उत्तराखंड में यह एक बड़ी समस्या है, जो कि सश्स्त्र सेना में योगदान देने वाले अनेकों जवानों का घर है। कई बार होता ये है कि किसी तरह की अनहोनी होने पर सारी सरकारी और बीमा सहायता उनकी पत्नियों को मिल जाता है। कई मामलों में वह विधवाएं दूसरा विवाह कर लेती हैं।

ऐसे में उन जवानों के माता-पिता पूरी तरह से निराश्रित हो जाते हैं। उनकी कोई वित्तीय सुरक्षा नहीं रह जाती। पैनल के पास ऐसे कई सुझाव आए हैं कि किस तरह से बच्चों की संपत्ति और आमदनी से माता-पिता का भी कुछ हिस्सा तय किया जाए, जिससे वह भी सम्मानजनक जीवन जी सकें। इस पैनल का कार्यकाल 27 मई को खत्म हो रहा है, लेकिन फाइनल रिपोर्ट पेश करने के लिए अगले महीने तक विस्तार मिल सकता है।

Recommended Video

    Uniform Civil Code पर Supreme Court का फैसला,राज्यों में गठित पैनल में कुछ गलत नहीं | वनइंडिया हिंदी

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+