उत्तराखंड में सरकार और संगठन में बदलाव को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट तेज, ये है फॉर्मूला
उत्तराखंड सरकार में सीनियर नेताओं, संगठन में युवाओं को तरजीह
देहरादून, 8 जुलाई। उत्तराखंड में सरकार और संगठन में बदलाव को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के दिल्ली दौरे के बाद एक बार फिर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि सरकार में पार्टी के सीनियर नेताओं जबकि संगठन में युवाओं को तरजीह मिलने जा रही है।

संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत
प्रदेश में संगठन की कमान महेंद्र भट्ट के संभालने के बाद से ही संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस बार संगठन 2024 लोकसभा चुनाव के हिसाब से ही तैयार किया जा रहा है। बद्रीनाथ में विधायक का चुनाव हारने के बाद भी महेंद्र भट्ट को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपने की पीछे भी बड़ी वजह युवा टीम को ही माना जा रहा है। इसके साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहली च्वाइस भी गढ़वाल के ब्राह्रमण चेहरे के रूप में महेंद्र भट्ट को माना जा रहा है। ऐसे में अब दोनों सरकार और संगठन में तालमेल बिठाने में जुट गए हैं। इसी के मद्देनजर महेंद्र भट्ट राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर चुके हैं, जबकि सीएम गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर गुरू मंत्र भी ले चुके हैं।
प्रदेश अध्यक्ष को ये मिला गुरू मंत्र
भाजपा सूत्रों का दावा है कि इस दौरान सरकार और संगठन में समन्वय बनाने के अलावा कार्यकर्ताओं को दायित्व और पार्टी में युवा चेहरों को अहम जिम्मेदारियां देने पर मंत्रणा की गई है। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष को कार्यकर्ताओं से लेकर पदाधिकारियों के प्रवास से लेकर ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने को कहा गया है। जिसके लिए उन्हें अधिक से अधिक प्रवास करने को कहा गया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अध्यक्ष की कुर्सी संभालने के बाद भी एक नई परिपाटी शुरू की है। भट्ट ने पहले ही दिन से पार्टी के कार्यकर्ताओं को तरजीह देने के साथ ही सभी विधायकों से मिलकर संवाद करना शुरू कर दिया है। जो कि अब तक के पदाधिकारियों के लिए एक नई पहल मानी जा रही है। कार्यकर्ता हमेशा नेतृत्व से संवाद स्थापित न होने की शिकायत करता आ रहा है। लेकिन महेंद्र भट्ट खुद से मिलकर संवाद स्थापित करने में जुट गए हैं। इसी पहल को पार्टी नेतृत्व आगे बढ़ाने की सलाह दे रहा है।
पार्टी के सीनियर कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को दायित्व बंटने की चर्चा तेज
इधर धामी सरकार में जल्द ही कुछ दायित्व बंटने की चर्चा तेज है। पहले सरकार के 100 दिन पर दायित्व का बंटवारा होने की चर्चा तेज थी जो कि अब 15 अगस्त के आसपास बंटने के दावे किए जा रहे हैं। इस लिस्ट में कई पार्टी के सीनियर कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा युवाओं को संगठन में जिम्मेदारी देकर इसे संतुलित करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि लोकसभा चुनाव को देखते हुए महेंद्र भट्ट को जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी साधने होंगे। इसके साथ ही पुराने कुछ चेहरों को भी रिपीट करने की मजबूरी होगी। लेकिन ये बात साफ है कि अब भाजपा के अंदर किसी गुटबाजी का कोई दबाव नजर नहीं आएगा। ऐसे में सरकार और संगठन में सामंजस्य बिठाने में नए चेहरों को कुछ ज्यादा परेशानी नजर नहीं आएगी। इसके साथ ही अब धामी सरकार में खाली 3 कैबिनेट की सीटों को भरने की भी चर्चा तेज है।












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