ऊर्जा प्रदेश में ही बिजली संकट, जानिए क्या है इसके पीछे की असली वजह

उत्तराखंड में बिजली खपत कई गुना बढ़ी, डिमांड कम हो रही पूरी

देहरादून, 25 अप्रैल। ऊर्जा प्रदेश आजकल भारी बिजली संकट से जूझ रहा है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्र तक बिजली संकट से जूझ रहा है, जिसका असर अब उद्योग पर भी पढ़ने लगा है। बिजली कटौती को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अधिकारियों को लेकर की गई सख्ती के बाद यूपीसीएल एक्टिव नजर आ रहा है। अब राज्य को केन्द्र से उम्मीदें हैं। उत्तराखंड सरकार ने बिजली संकट के बीच केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उत्तराखंड ने केंद्र से सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने और सेंटर पूल से मिलने वाला कोटा बढ़ाने की मांग की है। दावा किया जा रहा है कि सप्ताहभर में बिजली कटौती को और नियंत्रित कर दिया जाएगा। सरकार के लिए आने वाले दिनों में ओर मुश्किल बढ़ने वाली है चारधाम यात्रा भी शुरु होने वाली है। जिससे चुनौती बढ़ने वाली है।

uttarakhand Power crisis in the powe state know what is the real reason behind it

हर जगह हो रही बिजली कटौती
उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिस वजह से बिजली कटौती भी हो रही है।
रविवार को हरिद्वार के सिडकुल में लगभग 4 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 6-7 घंटे, ऊधम सिंह नगर में हर रोज तीन से पांच घंटे बिजली कटौती हो रही है। प्रदेश को वर्तमान परिस्थितियों में 100 मेगावाट बिजली की जरूरत है। ऊर्जा प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं से यहां 5211 मेगावाट बिजली पैदा होती है लेकिन राज्य कोटे के तहत 1320 मेगावाट बिजली ही मिलती है। प्रदेश में बिजली की सालाना मांग 2468 मेगावाट है। ऊर्जा निगम का कहना है कि बिजली किल्लत देशव्यापी है। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से गैस आधारित पावर प्लांट बंद हैं। कोयला आधारित प्लांट भी मुश्किल हालात में हैं। उद्योगों में बिजली की खपत अचानक बढ़ गई है। सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक बिजली खपत हो रही है। वहीं, अप्रैल माह में तापमान बढ़ोतरी की वजह से भी खपत में पांच से दस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

कई गुना बढ़ी है डिमांड
यूपीसीएल की मानें तो वर्ष 2001 में 8.3 लाख बिजली उपभोक्ता थे, जिनकी संख्या इस साल मार्च में 27.28 लाख पर पहुंच गई। प्रदेश में 2001 में बिजली का भार 1466 मेगावाट था जो कि मार्च तक बढ़कर 7967 पर आ गया। यूजेवीएनएल 2001 में 998 मेगावाट बिजली देता था जो कि अब 1356 मेगावाट तक आ गया है। साफ है कि बिजली का उत्पादन केवल 35 फीसदी ही बढ़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में खपत के हिसाब से डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है।

अब केन्द्र पर टिकी निगाहें
अब उत्तराखंड सरकार ने बिजली संकट के बीच केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उत्तराखंड ने केंद्र से सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने और सेंटर पूल से मिलने वाला कोटा बढ़ाने की मांग की है। उत्तराखंड को रोज 44 मिलियन यूनिट से ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ रही है। अपने संसाधनों से उसके पास सिर्फ 12 एमयू बिजली है। शेष 32 एमयू बिजली के लिए उत्तराखंड केंद्र और बाजार पर निर्भर है। अभी राज्य को सेंटर पूल से 17 एमयू तक बिजली मिल रही है। शेष 15 एमयू बिजली रोज बाजार से खरीदी जा रही है। राज्य इस पर प्रतिदिन 15 से 20 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

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